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आपके बच्चे इंटरनेट पे कैसे सुरक्षित सफर कर सकें

इंटरनेट को बच्चों के लिए सेफ रखें, मज़ा किरकिरा किये बिना !

2020 ने बहुत कुछ सिखाया| और साफ़ दिखाया कि इंटरनेट वो जगह नहीं जहां हम समय समय पे जाते हैं, इन्टरनेट अब हमारी रोज़मर्रा का हिस्सा है| ऑनलाइन और ऑफलाइन की दुनिया के बीच की लाइन अब मिट सी चुकी है|  इसका मतलब है कि यह हमारे बच्चों की दुनिया का भी हिस्सा है| पढ़ाई, खेल कूद दुनिया के बारे में और जाने की उनकी  जिज्ञासा को छूट देने का एक ज़रिया | मम्मी डैडी लोगों को इन्टरनेट को लेकर थोड़ी हिचकिचाहट है| जोकि एक तरह से वाजिब है| इस दिक्कत को यूं देखिये- ट्रैफिक में सड़क क्रॉस करना खतरनाक होता है और कहीं से भी गाड़ी आ जा सकती है| पर तब भी हम अपने बच्चों को सावधानी से सड़क क्रॉस करना सिखाते हैं| तो उसी तरीके से हम बच्चों को इन्टरनेट इस्तेमाल करना भी सिखा सकते हैं| तो मम्मी डैडी एजेंट्स, “नहीं, माँ दा लाडला बिगड़ गया,” वाली सोच को डालो  गड्ढे में l और कुछ आसान से सुरक्षित तरीके जानो, जिनसे बच्चे आसानी से इन्टरनेट इस्तेमाल कर सकें|  इन चार बातों की तो दिमाग में गाँठ बाँध लो:

  1. याद रखने वाली बात: काबिल बनाओ – इंटरनेट को उनके सामने एक खतरनाक जंगल की तरह न पेश करो| बल्कि आप बच्चों को सुरक्षित तरीके से इन्टरनेट इस्तेमाल करना सिखा रहे हो|
  2. खुश रहो और सेफ रहो – आप मोरल पुलिस ना बन जाओ|  यहां मसला, अच्छे बुरे का नहीं है, बल्कि सुरक्षित और असुरक्षित के बीच के फर्क को समझने का है| उस ही तरह जैसे आप अपने बच्चों को  सेफ सेक्स, सेफ टच और सेफ चैटिंग के बारे में बतायेंगे|
  3. रोको नहीं, सुरक्षित रखो- अपने बच्चों को इन्टरनेट इस्तेमाल करने, और चीज़ों के प्रति अपनी सोच खुद बनाने  में सक्षम बनाएं| और फिर उन्हें खुद अपने निर्णय लेने दें l उन्हें ज़िन्दगी के अनुभवों से बचा कर रखने से, आप उनके विकास को रोकेंगे|
  4. आप हमेशा उनका साथ देंगे- चाहे कुछ भी हो जाए| अपने बच्चे को इस बात का हमेशा विशवास दिलाते रहें कि आप हमेशा सौ प्रतिशत उनका साथ देंगे| पर हर वक़्त, उनके साथ चिपके नहीं रहेंगे| याद रखिये, आपके बच्चे को भी प्राइवेसी चाहिए| आप जितना इस बात को सम्मान देंगे, उतना ही आपका बच्चा अपनी मर्ज़ी को समझने और बयान कर पाने में कॉंफिडेंट होगा|

इन सिद्धांतों को ख्याल में रखते हुए ऐसे टिप्स जानिये, जो आपको और आपके बच्चे को,  इन्टरनेट का सही तरीके से उपयोग करना सिखायेंगेl  

हर नयी चीज़ की तरह, इन्टरनेट का इस्तेमाल भी उम्र अनुसार, थोड़ा थोड़ा इस्तेमाल करने से, शुरू करना चाहिए|  अगर आपका बच्चा पहली बार डिजिटल दुनिया में कदम रख रहा है, तो बेहतर होगा कि आप ही  इस दुनिया से उसकी पहचान कराएं | ऑनलाइन गेम्स में चैट कैसे करना है, गूगल से क्या और कैसे पूछना है, सोशल मीडिया एप्पस के बारे में और उन सभी चीज़ों के बारे में, जो आप फ़ोन पर रखते हैं| उन्हें बताएं, कि आपकी इस इन्टरनेट की दुनिया से पुरानी पहचान है| और आप इसे समझने में उनकी मदद करेंगे|  जब आपके बच्चे बड़े हो रहे हों, तो उनको इन्टरनेट की तिजोरी खुद से खोलना सिखायें-उनको उनकी डिजिटल आज़ादी से अवगत करायें| छोटी छोटी चीज़ों से शुरू करें| जैसे इन्स्टाग्राम अकाउंट, ऐमज़ॉन/amazon  वेबसाइट पर पेमेंट करना,  या फ़िर उनको खुद से, पेमेंट करके कोई एप्प खरीदने दें | उन्हें दिखायें कि आप को उन पर भरोसा है|  

इन्टरनेट की दुनिया में चलते हुए, आपके सामने कुछ गड्ढे आ सकते हैं| तो बाबूजी, संभल कर चलिए|  साइबरबुल्लियिंग/ cyberbullying (bullying= दादागिरी),  इन्टरने या फ़ोन पर किये जाने वाले इस किस्म के व्यवहार को कहते हैं| कभी कभी, यह आपके बच्चे के जान पहचान वाले होते हैं, या कोई बिल्कुल ही अनजान इंसान| इस किस्म की हरकत कभी भी हो सकती है – जब आपका बच्चा अकेला हो तब भी|  डोक्सिंग का मतलब होता है निजी जानकारी को इन्टरनेट पर लीक करना|  आप अपने बच्चों से इनके बारे में बात करने से ही इन हालात से सामना करने के लिए उनको तैयार कर सकते हैं| इसकी शुरुआत आप  साइबरबुल्लियिंग, स्टॉकिंग( एक किस्म का उत्पीड़न, जब कोई अनचाहे रूप से आपके  सोशियल मीडिया गतिविधियों के बारे में जानकारी रखे), डोक्सिंग(निजी जानकारी लीक करना), और ट्रोलिंग(ऑनलाइन किसी का बद्तमीज़ या हिंसक रूप से मज़ाक उड़ाना) और उनसे जुड़े खतरों के बारे में खुल कर बात कर सकते हैं| निजी जानकारी/ private information  के बारे में बात करिए- कैसे वो किसी भी डिवाइस पर एप्पस पर लॉग इन कर के, उन्हें  औन न छोड़ें , अनजान लोगों से अपना फ़ोन नम्बर, पता और लोकेशन शेयर नहीं करें| उन्हें  समझाइये कि ये कैसे सुरक्षित इन्टरनेटिंग करने का एक तरीका हो सकता है|   एक तरीका है, कि आप उन्हें ये बात समझाओ  – “जो तुम ऑफलाइन नहीं करोगे, वो ऑनलाइन मत करो|” डिजिटल दुनिया में पहचान गुप्त रखी जा सकती है ,  पर इसका फायदा उठा के अक्सर साइबरहिंसा को प्रोत्साहन मिलता है| अपने बच्चे को बतायें कि यह हर बार ये गुप्त पहचान फ़ायदेमंद नहीं होती| इस तरह से आप उनको ये समझना भी सीखा सकते हैं, कि उनके साथ कब डोक्सिंग या बुल्लियिंग हो रही है l इस पेज पर आपको डिजिटल दुनिया और साइबर बुल्लियिंग के बारे में उपयोगी जानकारी मिल सकती है: http://aarambhindia.org/knowing-risks-cyberbullying-cyberstalking-trolling-doxing/

जब आपके बच्चे फेसबुक अकाउंट बना रहे हों, या ऑनलाइन गेम्स खेल रहे हों, तो आस पास रहें| उनके ऊपर हावी न हों | उनके सवालों का जवाब दें| इन्टरनेट इस्तेमाल करने का समय तय करें| खासतौर पर जब वो किशोर अवस्था में हों| अपने बच्चे की डिजिटल दुनिया में बिना पूछे ताक झाँक करना बिल्कुल वैसे ही होता है, जब आप अपने बच्चे के रूम में बिना दरवाज़ा खटखटाये प्रवेश करते हैं और उनको आप पर चिल्लाना पड़ता है| आपके बढ़ते हुए युवा व्यस्क की प्राइवेसी महत्वपूर्ण होती है| यह प्राइवेसी उनको खुद के बारे में जानने में मदद करती है| और चीज़ों के बारे में खुद से सीखने में मदद करती है| याद रखिये, जो चीज़ें बैन होती हैं, उन्हें करने का मन करता है| उन्हें स्पेस न दी तो  वो आपसे छुप छुप कर और बिना सावधानी के वही चीज़ें करेंगे| तो उन्हें साँस लेने की जगह दें| पर उस समय हाज़िर रहें, जब उनको आपकी ज़रुरत हो| 

चाहे डाइटिंग का मामला हो या रिश्तों का, बैलेंस रखना बड़ा  ज़रूरी है| तो ध्यान रखें,  कि उन्हें स्पेस देने के चक्कर में कहीं दूरियां न बन जाएँ|  जब आपका बच्चा अपने बाहरी रूप, सजने संवरने पे, कुछ ज़्यादा ध्यान देने लगे , तो सतर्क रहें | ये ग्रूमिंग का असर हो सकता है l ग्रूमिंग क्या होती है? ऑनलाइन, आपका बच्चे का  किसी अनजान व्यक्ति या पहचान के व्यक्ति के साथ इमोशनल जुड़ाव बढ़ सकता है l इसके ज़रिये वो अनजान या पहचान वाला आगे चलके आपके बच्चे का फायदा उठा सकता है या उसका सेक्सुअल उत्पीड़न कर सकता है| इसकी शुरुआत ग्रूमिंग से होती है|  जब आपका बच्चा आपसे दूर दूर रहने लगे, हद से ज़्यादा समय इन्टरनेट पर बिताने लगे और इन्टरनेट का इस्तेमाल करते वक़्त ,उसका मूड बदलता रहे- तो समझ लीजिये खतरे की घंटी बज चुकी है| और अब आपको दखल देने की ज़रुरत है| अगर आपका बच्चा हर बात पर ज़्यादा चिल्लम चिल्ली करने लगा हो, या उसके पास ऐसे इलेक्ट्रॉनिक्स हों जो आपने नहीं खरीदें हैं,  या फ़िर हिंसा या सेक्स से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल करने लगा हो, जो उसके उम्र के बच्चों को नहीं पता होने चाहिए,  तो समझ लीजिये कोई उसको ऑनलाइन ‘ग्रूम’ कर (बहला) रहा है| क्या करें जब आपको पता चले की कोई बड़े उम्र का व्यक्ति आपके बच्चे को ऑनलाइन ग्रूम’ कर रहा है/जान के  बहला रहा है? पहली बात, घबरायें नहीं| आप अपने बच्चे से खुल कर इसके बारे में बात करें| उसे किसी प्रोफेशनल मनोवैज्ञानिक के पास ले जाएँ जो उनकी बात को समझे और समझा भी सके| अगर बात हाथ से थोड़ी निकल चुकी है, तो 1098 पर कॉल करें(भारत में , चौबीस घंटे चालू बच्चों के लिए CHILDLINE नामक Ngo  का  हेल्पलाइन नम्बर) या फ़िर POCSO e-box पर चुनी हुए घटनाओं के बारे में बताएं| इससे आपको डिजिटल  दुनिया में होने वाली बातचीत और उत्पीड़न से जुड़े कानूनी पहलूओं के बारे में भी पता चलेगा| जिसके बारे में आप हमारे डिजिटल कानून के बारे में लिखे आर्टिकल में पढ़ सकते हैं|       बे-सिरपैर के रूल्स ना बनायें| और अगर आपके बच्चों से गलती हो जाए, तो इस तरह ना बर्ताव करें कि दुनिया में अब कुछ बचा ही नहीं है|  उनसे बात करने के लिए, अपनी सोच को बदलने के लिए, तैयार रहें| इससे आपके और आपके बच्चे के बीच चर्चा को बढ़ावा मिलेगा| और इससे उनको एहसास होगा कि वो घर में अपनी बात,  दिल खोल के करसकती है| आपके बच्चे का बड़ी सारी चीज़ों के प्रति उत्सुक होना, स्वाभाविक है| जैसे, पोर्न| जब वो इसके बारे में बात करे, तो उस पर गुस्सा ना करें| उसके दिमाग में सेक्स की गलत छवि ना बनायें| इसके बारे में खुलकर बात करें|उसे बताएं कि ऐसी कौन सी बातें हैं, जो वो वयस्क होके कर सकते हैं पर जो अभी करना उनके लिए सही न होगा l जब आपके बच्चे छोटे हों, तो आप पैरेंटल कोड्स और एप्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं| ताकि उन तक वो चीज़ें ना पहुंचे जिनके लिए वो तैयार ना हों| एक माँ इस स्थिति को कैसे हैंडल करती है, आप यहाँ पढ़ सकते हैं|  आखिर में, आप अपने बच्चों के साथ एक हद तक ही जा सकते हैं| और फ़िर आपको उन पर भरोसा करना होगा कि उसके बाद वो खुद का ख्याल रख सकते हैं| उन्हें वो सब बताएं और सिखायें, ताकि वो अपने हित में फ़ैसले खुद ले सकें| और हर समय ऐसा माहौल रखें कि उन्हें ये आश्वासन रहे कि कुछ भी गड़बड़ होने पर वो आपके पास आ सकते हैं और आप उनका साथ ज़रूर देंगे |    बाकी का देखा जाएगा| अपने बच्चों के लिए और सरल सुझावों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें Six Simple Suggestions to Help Parents Look Out For Their Child’s Mental Health.  

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