मुंबई में प्रेमी कहाँ जाते हैं इश्क़ लड़ाने ?

मार्लेन बाल्डेवेग-राउ द्वारा

मानो किसी को अपने पार्टनर से अपना प्यार जताना हो, तो ऐसे में वे कहां जाते हैं? चाहे हाथ पकड़ना हो या सिर्फ बात करनी हो या बदन की नज़दीकियां बढ़ानी हो? अगर अपने पार्टनर को घर लाना मुमकिन ना हो, तो मुंबई में ऐसी कौन सी जगहें हैं जहां अकेले में कुछ समय बिताया जा सके? मैंने कुछ लोगों से पूछा।

 

 “मैं उसे वीडियो कॉल करता और उससे कहता- मैं तुम्हें बहुत ज़्यादा मिस कर रहा हूँ। क्या तुम वापस आ सकती हो?”

 मरीन ड्राइव – नव्य, पुरुष, 24

 

“मुंबई के मेरे पहले महीने में जब भी मैं मरीन ड्राइव जैसी किसी भी रोमांटिक जगह पर जाता था, तो उसे वीडियो कॉल करता था। और उससे कहता था- मैं तुम्हें बहुत ज्यादा मिस करता हूँ। क्या तुम किसी तरह वापस आ सकती हो? प्लीज वापस आ जाओ।  मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करूंगा।”

एक साल पहले, नव्य और उसकी गर्लफ्रैंड ने मुंबई जाने का फैसला किया था। नव्य एम.बी.ए कर रहा था और उसकी गर्लफ्रैंड दिल्ली में नौकरी। दोनों ने एक नई नौकरी के लिए साथ इंटरव्यू दिया था और दोनों ही सेलेक्ट हो गए। “तो हमने तय किया कि भाड़ में जाए बाकी सब, हम तो यही नौकरी करने वाले हैं। उस समय हमें यूं लगा कि हमारी किस्मत हमें कह रही है, कि हम एक साथ रहने के लिए ही बने हैं।” नव्य ने अपना एम.बी.ए करने का प्लान छोड़ दिया, और उसकी गर्लफ्रैंड ने अपनी दिल्ली की नौकरी छोड़ दी। फिर 2017 में दोनों दिल्ली के हवाई अड्डे पर मिले।

मुंबई में नव्य का पहला दिन अपनी गर्लफ्रैंड और उसके माता-पिता (जो नहीं जानते थे कि वे एक दूसरे को डेट कर रहे थे) के साथ बीता। फिर नए ऑफिस में और भी कुछ छिटपुट काम थे। उसके बाद दोनों अपने-अपने नए घर की तलाश में अलग-अलग निकल पड़े।  नव्य और उसके 6 पुरुष सहयोगियों ने उसका  नया फ्लैट देखा और अपनी मंजूरी दी। लेकिन उसकी गर्लफ्रैंड के माता-पिता को लगा कि औरतों के लिए फ्लैट में अकेले रहना सुरक्षित नहीं है और इसलिए उसे मुंबई छोड़ना होगा।

नव्य ने बताया, “मुंबई जाने से एक महीने पहले, हमने तय किया था कि अपनी पहली सैलरी से मैं एक मोटरबाइक खरीदूंगा और अगले दो साल में हम मुंबई का कोना-कोना छान मारेंगे।” मरीन ड्राइव उन सब जगहों में खास थी, जहां वो अकेले ही गया। “ये पहली बार था जब मेरी आँखों से आँसू निकल आए और मैंने महसूस किया, “मैं सच में उसे काफी मिस करता हूँ।”  मैं वहाँ रात के लगभग 10-11 बजे आया करता था और वहाँ बैठकर यही सोचता रहता था कि अगर वो होती तो क्या होता। हम किस बारे में बात करते? शायद हमारे भविष्य, आशंकाएं और इन चीज़ों से जुडी हर बात पर!” यही सोचते-सोचते सुबह हो जाती और फिर वो 4:30 की पहली लोकल पकड़ कर अपने घर चला जाया करता था।

एक साल बीत गया। वो अभी भी मुम्बई में है, और अब ओके क्यूपिड (OKCupid) जैसे डेटिंग ऐप पर भी। अपनी मैच (match) को वो पहली डेट पर कहाँ ले जाएगा? अभी तक उसने ये सोचा तो नहीं है, लेकिन मरीन ड्राइव तो पक्का ही उसकी लिस्ट में है। उसने कहा, “ये जगह जोड़ों के लिए ही जानी जाती है और यहां लहरों की आवाज़ भी कितनी अच्छी है”। नव्य अपनी गर्लफ्रैंड के साथ बाइक पर लम्बी सवारी के लिए भी जाना चाहता है। “बैंडस्टैंड बहुत ही सेक्सी जगह है। बैंडस्टैंड की ओर मोटरसाइकिल की सवारी सच में काफी मस्त होगी।“

 

“हम उस तरफ बिना किसी मकसद के ही चल पड़ते थे, और यही सबसे अच्छी बात थी। क्यूंकि इसका मतलब था कि हम दोनों सच में एक दूसरे के साथ वक़्त बिताना चाहते थे।”

बांद्रा – हर्षल, पुरुष, 23

 

“मेरा पहला किस, चर्चगेट स्टेशन के ठीक बगल वाली एक छोटी सी गली में हुआ था। मैं 18 या 19 साल का था और मेरे सारे दोस्त अपनी पहली किस कर चुके थे। तो समझ लो कि मेरे ऊपर भी बिना मतलब का ही एक दबाव था,” हर्षल ने बताया।  “हम एक फुटपाथ पर बैठे हुए थे और मैं उसे बता रहा था कि मैं उसकी कितनी परवाह करता हूँ। तभी उसने कहा, ‘सुनो, मुझे किस करो।’ हमने उसी वक़्त एक दूसरे को किस किया और ये किस बॉलीवुड की मूवी से कम मज़ेदार नहीं था!”

एक दिन जब दोनों हर्षल की गर्लफ्रेंड के घर की और बढ़ रहे थे, हर्षल 

 ने अचानक ही अपने एक घुटने पे बैठकर बॉयजोन (Boyzone) का गाना “वर्ड्स (Words)” गाना शुरू कर दिया। “सब कुछ बहुत अचानक, बस कुछ सेकण्ड्स के लिए हुआ। और वो शर्म से लाल हो गयी। यह पहली बार था जब हम बांद्रा की उन गलियों में चल रहे थे,” हर्षल ने बताया।

बांद्रा की गलियों में ऐसे पैदल साथ घूमना हर्षल और उसकी उस एक्स-गर्लफ्रेंड के लिए रोज़ की बात हो गई थी। “वहाँ उन गलियों में ऐसे कई सारे कोने थे जहाँ घुस कर हम चोरी चोरी एक दूसरे को छोटी चुम्मियाँ देते थे। वो सब कुछ मुझे अच्छी तरह से याद है। हम हमेशा हाथ पकड़े रहते थे लेकिन उस ख़ास घड़ी के इंतज़ार में रहते जब हम चोरी छिपे वो किस ले सकें।”

“हम हमेशा वही रास्ता नहीं लेते थे, ना ही सीधी सड़कों पर ही चलते। सच तो ये है कि हमें इसकी परवाह ही नहीं थी कि हम कौन सी सड़क ले रहे हैं, हम बस किसी भी तरफ चलते चले जाते थे। और यूँ ही किसी जगह पर रुक कर पानी-पूरी खा लिया करते थे। ना किसी और चीज़ पर ध्यान जाता था, ना ही समय की परवाह करते थे।”

“हम वहां बिना मकसद ही चलते रहते थे और यही बात तो सुन्दर थी । इससे हमें पता लगता था कि हम दोनों सच में एक दूसरे के साथ वक़्त बिताना चाहते थे।”

“हम बीच-बीच में यह भी देख लेते थे कि कहीं उसके परिवार वाले घर वापस तो नहीं आ गए। और अगर ना आएं हों, तो हम जल्दी से उसके घर के अंदर चले जाते थे। वो हम दोनों के लिए बहुत ही स्पेशल पल हुआ करता था,” हर्षल ये बताते हुए हंस पड़ा।

इस सैर में ही अक्सर समय बीतता था। “आखिर में हम उसके घर से एक गली छोड़कर रुक जाते थे। ताकि उसके पड़ोसी या उसके माता-पिता कोई भी हमें देख ना लें। वहां ऐसी छोटी-छोटी  टैक्सियाँ होती थीं जिनके पीछे बैठकर हम एक दूसरे को देर तक चलने वाली रुख़सतें जारी  रहती थीं। हालांकी उसके बाद भी हम घूमते रहते थे। फिर वो अपनी बिल्डिंग की ओर चली जाती थी और मैं तब तक देखता रहता जब तक वो ओझल नहीं हो जाती। और बस फिर मैं अपना फोन उठाता, उसे फ़ोन लगाता और हम फिर से बात करने लग जाते। ”

एक बार किसी अपार्टमेंट की बाहरी दीवार पर बैठकर वो बात कर रहे थे, और थोड़ा नज़दीक हो रहे थे। तभी एक चौकीदार बाहर आया और बड़े विनम्र तरीके से उन्हें वहां से उठकर जाने को कहा। उसने बताया कि उस अपार्टमेंट की बालकनी से किसी की नज़र उनपर पड़ी थी और उसने उनके बारे में शिकायत की थी।

 “ये मेरी सबसे पसंदीदा यादों में से एक है,” हर्षल कहता है।  “ऐसा नहीं है कि मुझे उस चौकीदार से कोई परेशानी थी या मैं उस सार्वजनिक स्थान पर अपनी मर्ज़ी से कुछ ना कर पाने से नाराज़ था।” वो तो एक छोटा सा मज़ेदार पल था। हम मासूम और नटखट महसूस कर रहे थे। वो हमारा चुराया हुआ बड़ा प्यारा सा पल था। ”

 

“ये सिचुएशन थोड़ी डरावनी हो सकती थी। वह किसी भी तरह का एक मोरल पुलिस (moral police) हो सकता था, और हम कानूनी लफड़े में फंस सकते थे।”

मरीन ड्राइव – स्नेहल, महिला, उम्र -22 

स्नेहल और उसकी गर्लफ्रैंड मरीन ड्राइव के करीब ही कहीं पी रहे थे और फिर उन्होंने अपनी डेट (Date) को जारी रखने के लिए मरीन ड्राइव जाने का फैसला किया। वे मरीन ड्राइव पर ही एक दूसरे से लिपटने लगे। एक आदमी उन्हें देखकर इतना हैरान हो गया कि कुछ देर तक उनको देखता ही रहा। “वह हमसे बस एक ही सवाल पूछता रहा – आप दोनों के बीच प्यार हुआ कैसे?'” शुरू में जो हमें उसके सवाल पर हंसी आ रही थी लेकिन जल्द ही हमें थोड़ी चिंता होने लगी। स्नेहल ने बताया, “हम जल्द ही उससे छुटकारा पाने में कामयाब रहे, लेकिन हम थोड़ा डर गए थे। वह किसी भी तरह का मोरल पुलिस हो सकता था, और हम कानूनी लफड़े में फंस सकते थे।”

स्नेहल बताती है कि मरीन ड्राइव उन जगहों में से एक है, जो रोमांस के लिए काफी फेमस है। वहां लोग दूसरों को अंतरंग होते देख कर भी बुरा नहीं मानते हैं। वो कहती है, “जैसे स्कूल में एक सीक्रेट स्पॉट (secret spot) होता है, ये भी उसी तरह का है। सब को पता रहता है कि वहां क्या होता है और स्कूल के अधिकारियों सहित सभी वहां जो हो रहा हो, होने देते हैं।” स्नेहल आगे कहती है,” लेकिन फिर भी, हमेशा यह डर रहता है कि कोई आपको पकड़ लेगा और पुलिस के हाथों सौंप देगा या फिर पुलिस खुद ही आपको पकड़ लेगी।”

 

“अगर आप मर्दों के साथ हो तो इतनी बड़ी कोई समस्या नहीं आती है, लेकिन औरतों के साथ हो तो सावधान रहना पड़ता है l “

ऑटोरिक्शा और टैक्सी – सोनल, महिला, 31

“मैं बाइसेक्सुअल हूं, और सार्वजनिक जगहों पर मर्दों और औरतों के साथ मेरा अनुभव अलग रहा है। अगर आप मर्दों के साथ हो तो इतनी बड़ी कोई समस्या नहीं आती है, लेकिन औरतों के साथ हो तो सावधान रहना पड़ता है, ” ऐसा सोनल का कहना है।

एक बार, जिस लड़की के साथ वो डेट पर गयी थी, उसने उसे सड़क पर खुलेआम किस कर लिया था। वे दादर के बाज़ार में जूते खरीद रहे थे और सड़क पार करने से ठीक पहले, वो झुकी और उसने इसके होंठों पर किस कर लिया। जैसे ही दोनों ने सड़क पार की, एक आदमी उनके पास आया और उसकी गर्लफ्रैंड के स्तन को दबोचने की कोशिश की। सोनल कहती है, “शुक्र है कि उसने बॉक्सिंग में ट्रेनिंग ले रखी थी। इसलिए उसने रिफ्लेक्स के तौर पर अपना हाथ ऊपर अपने सीने के आगे कर लिया, ताकि वह आदमी उसे छू भी ना पाए।”

सोनल आगे कहती है, “अगर हम मर्दों के साथ ज़्यादा चिपकने लगते हैं, तो जाहिर है कि देखने वाले लोगों को दिक्कत हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि वे ऐसा देखते ही आप पर झपट्टा मारने आ जायेंगे। लेकिन जब मामला क्वीर लोगों का होता है, तो लोग अपने काम से काम नहीं रखते, एकदम दखल देने को जैसे अपना हक़ समझते हैं।”

जब समलैंगिक (same sex) के बीच डेटिंग की बात हो, तो सोनल को किसी किसी गाड़ी के अंदर  मिलना ही पसंद है। “जब मुझे कुछ नज़दीकियां बनाने का मन करता है, या कामुक सा कुछ करने का,  तो मैं ऑटो में उस इंसान के साथ एक लंबा सफर कर लेती हूँ,” उसने बताया।

वो एक घटना बताती है, जब वो अपने उस वक़्त के पार्टनर, जो की एक ट्रांस पुरुष था और लिंग-परिवर्तन की प्रक्रिया में लगा हुआ था, के साथ टैक्सी में बैठकर माहिम से जुहू जा रही थी। दोनों एक दूसरे के साथ अंतरंग हो रहे थे। “वह खूबसूरत मर्द की तरह दिख रहा था, और हमने काफी पी भी रखी थी। हम सेक्स तो नहीं कर रहे थे, बस एक दूसरे को महसूस कर रहे थे और किस कर रहे थे। अचानक ही ड्राइवर ने हाईवे के बीचो-बीच गाड़ी रोक दी और हमसे कहा, – प्लीज, गाड़ी से उतरो।”

वो दोनों टैक्सी से बाहर निकले, हाईवे के किनारे थोड़ा इंतजार किया और फिर दूसरे ऑटो में अपने पार्टनर के घर निकल पड़े। सोनल ने बताया कि, “उस समय मैं उस बात से ज़्यादा परेशान नहीं हुई, बल्कि मुझे इसकी कोई परवाह भी नहीं थी। लेकिन एक पॉइंट पर ड्राइवर ने हाईवे पर गाड़ी रोक कर हमको उतरने को कह दिया।”

तो क्या मुंबई में ऐसी कोई जगह है जहाँ क्वियर लोग रोमांटिक होने पर या सेक्स करने की चाह होने पर, खुद को सुरक्षित महसूस करे सकें?

सोनल बताती है, “ऐसी क्वियर पार्टी जो किसी बार या पब में हो रही हो, और जहाँ के बाउंसर्स संवेदनशील हों, वो जगह अच्छी होती है। वहां क्वियर लोग एक दूसरे को किस कर सकते हैं और अंतरंग हो सकते हैं। समलैंगिक पुरुषों के लिए ट्रेन के डिब्बे हैं और त्योहार का माहौल है। बिल्डिंग की छतें, जगह और प्राइवेसी दोनों देती हैं।

वो कुछ शांत तालाब के किनारे या समंदर के किनारों के नाम बताती है जहां आप अपने को भीड़ से अलग-थलग पाएं और और जहाँ अपनापन लगे। जैसे कि कार्टर रोड, बैंडस्टैंड, मरीन ड्राइव, बांद्रा फोर्ट और वर्ली सी-फेस। वो एक घटना बताती है जब वो एक औरत के साथ झील के किनारे डेट पर गई थी और वो दोनों एक दूसरे के हाथों में हाथ डाल घूम पा रहे थे। सोनल ने अपना सिर अपनी पार्टनर के कंधे पर टिका दिया था। “मुझे लगता है कि बॉम्बे में प्यार करने की छूट है। खासकर इसलिए क्योंकि यहाँ जगह की काफी कमी है। हर कोई ये अच्छे से समझता है कि आपके पास प्यार करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है,” वह कहती है।

 

“मेरे दोस्त और मुझे आश्चर्य होता था कि ये लड़के-लकड़ियां सिर्फ घूमने और बैठ कर बात करने के लिए समुद्र किनारे जाते थे, क्योंकि हम तो वहां पानी के अंदर जाने के लिए जाते थे”

सुरूचि बीच (beach) – जोशुआ *, पुरुष, 24

“सभी कपल (couple) सुरूची बीच पर जाते थे। जब मैं 13-14 साल का था, तो मेरे दोस्त और मुझे आश्चर्य होता था कि ये लड़के-लकड़ियां सिर्फ घूमने और बैठ कर बात करने के लिए समुद्र किनारे जाते थे, क्योंकि हम तो वहां पानी के अंदर जाने के लिए जाते थे,” जोशुआ, जो कि एक अकाउंटेंट है, ने बताया। “कुछ कपल को होंठ से होंठ किस करते देखकर हमें लगता था कि वो सेक्स ही कर रहे हैं। मैं और मेरे दोस्त वहां जाकर उनको परेशान करते थे ताकि उनकी प्रक्रिया में बाधा डाल सकें। लेकिन समय के साथ जब मैं बड़ा हुआ तब मुझे समझ आया कि ये भी ज़िन्दगी का एक हिस्सा है, मेरा मतलब है ये रोमांस वाली चीज़ें।”

जोशुआ कहता है, “मेरी जिंदगी में तो बहुत रोमांटिक चीजें नहीं हैं, लेकिन समुद्र के किनारे मैंने कई सारी दिलचस्प रोमांटिक कहानियां देखी है। मैं अपने घर की चार दीवारी के अंदर ही ज़्यादा आराम महसूस करता हूँ। तो जब मैं दूसरों को बाहर रोमांटिक होते देखता हूं, मुझे हंसी आती है।” ऐसा लग रहा था जैसे 13 साल का जोशुआ बात कर रहा हो। लेकिन कुछ देर और बात करने के बाद, उसने बताया कि रोमांस के बारे में उसकी अपनी कुछ निजी सोच है।

“रोमांस वो है जब हम किसी को पसंद करने लगते हैं। जब आप प्यार में होते हैं, तो कुछ भी रोमांटिक हो सकता है। हम छोटे से छोटे सिग्नल पर भी खुश हो जाते हैं। रोमांस में सेक्स का होना ज़रूरी नहीं होता,” उसका ये मानना था। 

उसने रोमांटिक तरीके से किसी के बारे में सोचा तो है, लेकिन  वो अपने पार्टनर के साथ सुरूची बीच जैसी जगह पर कभी भी नहीं जाना चाहेगा। क्यूंकि वो अभी भी ऐसी जगहों को सेक्स के साथ जोड़ता है। वो कहता है, “मुझे ये सब चीज़ें करने में थोड़ा डर लगता है क्योंकि जब मैं 7वीं क्लास में था, तो हमारे एक टीचर ने कहा था कि आपको शादी के बाद ही सेक्स करना चाहिए। उस से पहले ऐसा करना पाप है। उनकी वो बात अब तक मेरे दिमाग में बैठी हुई है और मुझे AIDS जैसी बीमारियों से भी काफी डर भी लगता है।”

‘लोग क्या कहेंगे ‘ वाली बात भी जोशुआ के दिमाग में हमेशा रहती है। वो कहता है, “हमारी सोसाइटी के लोगों की वजह से हम अपने मोहल्ले में रोमांस नहीं कर सकते। ऐसी कोई जगह ही नहीं जहाँ हमें जज (judge) ना किया जाए। और अगर आप इस बात की परवाह नहीं करते हैं कि लोग क्या सोचेंगे, तो फिर आप ख़ुशी से जो चाहे कर सकते हैं। लेकिन इसका एक खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा- लोग तरह-तरह की बातें करेंगे, यहाँ तक कि शादीशुदा जोड़ों के लिए भी। लेकिन अगर इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता है तो फिर आप कहीं भी किसी भी समय रोमांस का मज़ा उठा सकते हैं। ”  

और इन सब बातों से उसकी एक पुरानी याद ताज़ा हो गयी। उसने बताया कि कैसे एक बार वो अपने परिवार के साथ सुरुचि बीच पर गया था। “मेरे चाचा मेरी चाची को मज़ाक में छेड़ रहे थे। परिवार के लोगों में भी सार्वजनिक जगहों पर रोमांस हो सकता है। वो साथ गाना गा रहे थे, मस्ती कर रहे थे और ऐसा सब कुछ कर रहे थे जो वो आम तौर पर घर में नहीं करते थे,” उसने कहा।

 

“ये हमारे रिश्ते का एक बहुत बड़ा हिस्सा था। अगर मैं किसी और को यहाँ लाऊंगी, तो उसका कोई मतलब नहीं होगा।“

अपार्टमेंट की छत – नताशा, महिला, 23

सोमवार की देर दोपहर है, और नताशा और उसके प्रेमी को अलग हुए करीब एक साल और एक हफ्ते हो चुके हैं। हम लिफ्ट से 17वें मंजिल पर पहुंचे और वहां “रिफ्यूज एरिया” लेबल वाले दरवाज़े को खोलकर अंदर गए। अंदर घुसते ही हमारे सामने एक सफेद, सुंदर, खुली जगह थी जहां से मुंबई का आकाश (स्काइलाइन/skyline) एक बैकड्रॉप (backdrop) की तरह दिख रहा था। जहां गर्माहट से भरे उन रोमांटिक पलों में ठंडक सा महसूस हो जाये। “हमारे दो साल के रिश्ते में, ये हमारा अपना पर्सनल स्पॉट था। हम दोनों अपने-अपने ऑफिस का काम ख़त्म करते थे। वो यहाँ से बस दो स्टेशन दूर माटुंगा रोड में काम करता था। मैं उससे अपार्टमेंट के नीचे सीढ़ियों पर मिलती थी, और फिर हम दोनों सीधे यहीं ऊपर छत पर आ जाया करते थे।”

वो हमें रिफ्यूज एरिया के एक दूसरे ऐसे कमरे में ले गयी, जो दरवाज़े से दिखाई नहीं देता था, और बोली, “लाइट का स्विच अंदर आने वाले दरवाज़े के ठीक बगल में है। जब हम अंदर आते थे तो लाइट्स को ऑफ रखते थे, ताकि अगर कोई और वहां आये और लाइट्स का स्विच ऑन करे तो हमें पता चल जाये कि कोई आया है। हमने इस चीज़ का पूरा ध्यान रखा कि अगर कोई हमें पसीने-पसीने भी देख ले, तो उन्हें ऐसा ना लगे कि हम वहां कुछ कर रहे थे।”

क्या होता अगर कोई उनको “आपत्तिजनक” हालत में देख लेता?

“वो बहुत ही बुरा होता क्योंकि तकनीकी रूप से ये एक सार्वजनिक जगह है। अपार्टमेंट की अपनी एक सोसाइटी कमिटी है, जो इन सब चीज़ों का ध्यान रखती है, और ये मैटर उनके पास जाता। और फिर मेरे माँ-बाप भी इसमें शामिल हो जाते, और फिर मेरे दादा-दादी सहित बाकी सब को भी पता चल जाता। फिर वहाँ नोटिस जारी किए जाते। ये एक छोटी सी सोसाइटी है। तो बस एक स्कैंडल ही बन जाता,” नताशा ने कहा। और सच में वो लोग दो बार बाल-बाल बचे थे, “लेकिन हम लकी थे कि कभी पकड़े नहीं गए।”  

 

“उसको छत से दिखने वाला नज़ारा बहुत पसंद था। उसको यहां का अँधेरापन भी पसंद था। उसको पसंद था कि यहां आकर उसे अपने काम और तनाव से मुक्ति मिलती थी। ये ऐसी जगह थी जहाँ बस हम दोनों साथ होते थे। ये हमारी अपनी स्पॉट बन गयी थी।”

एक बार वह काम से सीधे वहाँ आया और उसे किटकैट देकर सरप्राइज किया, क्यूंकि उसे पता था कि नताशा को किटकैट काफी पसंद है। वो दोनों वहीँ फर्श पर बैठ गए और पिकनिक जैसा मनाया। “यह जगह हमारे रिश्ते में एक बहुत कीमती जगह रखती है,” उसने कहा। यहाँ हर तरह की बातें हुई हैं; दोनों जब एक दूसरे से नाराज़ होते थे तब की बातें, एक दूसरे के नौकरी को लेकर हुई हैं बातें, उनके भविष्य को लेकर, उनके ट्रिप्स को लेकर, और अंत में ब्रेकअप की बातें भी वहीँ हुई थी। “ब्रेकअप की बातें वहीँ होनी ही थी। वो सारी बातें भी तो उसी जगह होनी चाहिए थी जहाँ हमने ना जाने कितनी ही तरह की और बातें की थीं। ये सही मायने में हमारी चीज़ थी, हमारी जगह थी।”

एक बार, नताशा अपने एक दोस्त को उस टेरेस से दिखने वाले नज़ारा दिखाने ले आई थी। उसके बॉयफ्रेंड को जब ये पता चला था तो उसने नताशा से कहा, “सुनो, ये तुमने अच्छा नहीं किया। ये हमारी जगह है, तुम किसी को भी यहाँ लाकर उनके साथ यहां समय नहीं बिता सकती हो। ये हमारी जगह है।”

क्या वह अपने फ्यूचर बॉयफ्रेंड के साथ कभी यहां आएगी? 

उसका जवाब था, “जितना मैं खुद को जानती हूँ, मुझे नहीं लगता मैं कभी ऐसा करूंगी। ये जगह हमेशा उस से ही जुड़ी रहेगी। ये हमारे रिश्ते का एक बहुत बड़ा हिस्सा था। अगर मैं किसी और को यहाँ लाऊंगी, तो उसका कोई मतलब नहीं होगा।”

 

इंडिया में अगर आप लोगों के लिए कोई ऐसी जगह बनाएंगे जहां वो रोमांस कर पाएं, तो लोग वहां जाएंगे ही नहीं।

गेटवे ऑफ इंडिया- कुमार*, पुरुष, 48

कुमार, जो कि एक फ्रीलांस आर्किटेक्ट (freelance architect) हैं, बताते हैं कि कैसे वो पहली बार अपनी पत्नी से मिले: “1996 में, जब मैं 29 साल का था, सिंगापुर में काम कर रहा था। और मेरे माता-पिता को डर था कि एक दिन मैं सिंगापुर की ही किसी लड़की से शादी कर लूँगा। उन्हें जब पता चला कि कुमार हफ्ते भर बाद छुट्टियों में घर आने वाला है, तो उन्होंने उसे उसकी होने वाली पत्नी, जो उस समय 25 साल थी और एयर इंडिया में काम करती थी, की तस्वीर भेज दी। उन दोनों ने एक बार फोन पर बात की और फिर अगले दिन दोनों कुमार के होमटाउन नागपुर में मिले। “उसकी एक बात से मैं काफी प्रभावित हुआ था। उसने कहा था, “मैं किसी भी जगह एडजस्ट कर लुंगी,। चाहे आप जहां भी जाएंगे,” कुमार ने बताया। दो दिन बाद वो वापस सिंगापुर के लिए निकल गया। वो उसे लव लेटर और तस्वीरें भेजा करती थी, लेकिन इसने ना कभी जवाब दिया ना कुछ भेजा। ” मुझे शायद कभी प्यार हुआ ही नहीं था। मुझे लगता था कि ये लड़कियों के चोंचले हैं। रोमांस लड़कों की चीज़ नहीं होती,” उसने कहा। दो महीने बाद, उनकी सगाई हो गई, और वो वापस सिंगापुर चला गया। 

“वो सारे मज़े मिस कर रही थी। अपने दोस्तों से उसने सुन रखा था कि कैसे सगाई के बाद लड़के-लड़कियां घूमने जाते हैं, रोमांटिक चीज़ें करते हैं,” कुमार ने बताया। फिर जल्द ही, उनकी शादी हो गयी। वो लोग हनीमून पर भी  नहीं गए और वो तुरंत ही अपने काम के लिए सिंगापुर लौट आया। वो बताता है, “मेरी बीवी बहुत रोमांटिक थी। अभी भी वही ज्यादा रोमांटिक है। मैं रोमांटिक नहीं हूं। स्वाभाविक रूप से ये मेरे अंदर आ ही नहीं पाता है।”

कुमार आगे बताते हैं, “हम दोनों साथ कभी डेट पर नहीं गए। हमारी सगाई के बाद, शायद एक बार हम बाहर गए थे, बस।”

अब, वीकेंड्स पर, रात को लगभग 10 बजे, जब ट्रैफ़िक कम होता है, तब कुमार, उनकी पत्नी और बेटी को लेकर गेटवे ऑफ़ इंडिया ड्राइव पर जाते हैं। कुमार कहते हैं, “मैं यहां शाम को देर से आना पसंद करता हूं। तब यहां बहुत शांति रहती है, लाइट्स जलते रहते हैं, अंधेरा भी रहता है।” गेटवे ऑफ इंडिया घूमने के बाद, वो लोग शॉपिंग के लिए कोलाबा मार्केट की तरफ चल पड़ते हैं। फिर ‘बड़े

मियाँ रेस्टोरेंट’ में कुछ स्नैक्स के लिए रुकते हैं। घर पहुँचते- पहुँचते रात के 2 बज जाते हैं। हर तीन महीने में एक बार वो इस ड्राइव पे निकलते हैं। ” वैसे भी अब कई दोस्त भी साथ हो लेते हैं। मेरी बेटी के दोस्तों के माता-पिता, दो-तीन दूसरे परिवार, सब साथ मिलते हैं और हम सब इकट्ठे ही बाहर जाते हैं,” कुमार ने बताया।

“मैं कहीं और जाना पसंद नहीं करता हूँ। गेटवे ऑफ इंडिया आपको शहर के अंदर होते हुए भी जैसे उसके बिल्कुल अंतिम छोर पे होने का एहसास देती है। इंडिया में अगर आप लोगों के लिए कोई ऐसी जगह बनाएंगे जहां वो रोमांस कर पाएं, तो लोग वहां जाएंगे ही नहीं। मैंने कभी भी जोड़ों को समुद्र के किनारे रोमांटिक होते नहीं देखा।”

 

“ये बहुत ही शांत और बहुत सुंदर है। हम यहां सूर्यास्त देखने और अंडा-पाव खाने आते हैं” 

अक्सा बीच – मज़हर, पुरुष, 30 और पूर्णिमा, महिला, 22 

“जब मैं पहली बार पूर्णिमा को यहाँ लाया था, मुझे याद है कि जैसे ही वो समुद्र के करीब पहुँची – इधर उधर भागने लगी थी। एक छोटे बच्चे की तरह, एक जगह से दूसरे जगह दौड़े जा रही थी,” मज़हर ने बताया। “वो बहुत खुश थी। उसकी इस ख़ुशी को देखकर मुझे बहुत सुकून मिला था। बस तभी मैं समझ गया था, कि ये हमारा अपना स्पॉट बनने वाला था।”

पूर्णिमा और मज़हर अपने होटल के कमरे की बालकनी में बैठ, मसाला चिप्स खा रहे हैं। लहरों और बारिश की आवाज़ सुन रहे हैं और अक्सा बीच को खुद में समा लेने वाले अंधेरे को देख रहे हैं। पूर्णिमा का जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ था, लेकिन अपनी फ्लाइट अटेंडेंट रेजिडेंसी कोर्स शुरू करने के लिए एक साल पहले वो मुंबई आई थी। मज़हर, जो मुंबई में ही जन्मा और पला-बढ़ा था, पिछले 9 सालों से केबिन सुपरवाइजर के रूप में काम कर रहा था। दोनों बैंकॉक की एक उड़ान के दौरान मिले और बस उनके बीच रोमांस शुरू हो गया।

“उस समय मैं थोड़ा शर्मिंदा महसूस करता था। मैं एक सुपरवाइजर हूँ, मैं ये कैसे कर सकता हूँ,” मज़हर ने बताया। “हम एक फ्लाइट पर हैं, एक साथ काम करते हैं। मैंने अपने लाइफ में ऐसा कभी नहीं किया था।”

एक कपल के रूप में तो दोनों हमेशा काम के कारण ट्रेवल ही करते रहते थे। हालांकि दोनों की कोशिश रहती थी कि एक ही फ्लाइट की जिम्मेदारी मिले ताकि दोनों कम से कम 2-3 दिन तो साथ में बिता सकें। “ये हमारे लिए छुट्टी बिताने जैसा हो जाता था। हम साथ काम करते हैं और काम के बाद एक साथ होटल चले जाते हैं” पूर्णिमा ने बताया। वो दोनों खिलखिला रहे थे जब मज़हर ने वो वाक्या बताया जब फ्लाइट पूरी होने के बाद फ्लाइट के सारे केबिन क्रू प्लेन से बाहर उतर चुके थे ये दोनों परदे के पीछे छुपकर एक दूसरे को किस करने लगे थे। “ये तो समझो एक सपना था जो सच हुआ था,” मज़हर कहता है।

हालाँकि अक्सा बीच थोड़ा दूर है, लेकिन मज़हर को ये इसलिये पसंद है क्योंकि वो उसके घर के नज़दीक है और पूर्णिमा को यहाँ लाने से पहले भी वो वहाँ अक्सर जाया करता था। “मुझे लगा कि प्यार और रोमांस के लिए ये सबसे सही जगह रहेगी। और मुझे ये जगह इसलिए भी पसंद थी क्योंकि यहाँ एक अलग ही तरह की शान्ति है। पूर्णिमा ने जुहू बीच की चर्चा की थी पर मैंने कहा कि एक तो वो काफी बोरिंग जगह है और दूसरा, वहां काफी भीड़ रहती है।”

 पूर्णिमा बताती हैं, “हम यहां सूर्यास्त देखने और अंडा-पाव खाने आते हैं।”

“अगर बारिश हो रही हो, तो हम अंडा-पाव कार में ही खाते हैं। और फिर बैठकर, हाथों में हाथ डालकर बात करते हैं।” पूर्णिमा उत्तेजित होकर बताती है, “फिर हम किस करते हैं!”

उसी वक़्त फिर से बारिश होने लगती है। वे दोनों हँसने लगते हैं, जैसे वो दोनों छोटे बच्चे हों और अभी-अभी सीखा हो कि किस किसे कहते हैं।

पूर्णिमा कहती है, “कार काफी सुरक्षित जगह है, पूरी तरह से बंद रहती है।”

“हाथ में हाथ डाले रखो तो लोगों की वो घूरती नज़र अच्छी नहीं लगती।” मज़हर खान कहता है, “मुंबई में रोमांस करना बहुत ही मुश्किल है।”

कभी-कभी रात को 11 बजे के बाद वो दोनों चुपके से मज़हर के परिवार वाले घर चले जाया करते हैं, और मज़हर के माता-पिता के साढ़े छह बजे उठने से पहले पूर्णिमा वहां से निकल जाया करती है। पूर्णिमा कहती है, “हमारे 75% डेट बीच पर होते हैं, 20% डेट विदेश में और 5% डेट चोरी-छिपे इसके घर में।”

अगर आपके लाइफ में ये बीच नहीं होता तो फिर आप दोनों कहाँ जाते, मैंने पूछा।

मजहर खान ने पूर्णिमा की तरफ देखते हुए कहा, “ये काफी अच्छा सवाल है। हम कहां जाते?”

 

*रिक्वेस्ट पर नाम बदला गया है।

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