वे औरतें जिनसे मैं मोहब्बत करती हूँ

समीरा अय्यंगर द्वारा

चित्र देबोराह माहेर द्वारा

 

 

मूझे वो औरत पसंद है जो ठहाके मारकर हंसती है

चमचमानेवाली हंसी

खिलखिलानेवाली हंसी

पेट के अंदर से गड़-गड़ाने वाली हंसी  

छाती को भारी करनेवाली, हंसी को दुगना करने वाली हंसी

अपनी खूबसूरती को हवा में फैलानेवाली हंसी

आप उन्हें स्वीकारें या ना स्वीकारें  

मुझे वो औरत पसंद है जिसका शरीर गलत है

परंपरागत मापों के अनुसार

इससे मेरा मतलब उन बेतुके मापदंडों से है जो हमें उन माप और आकारों के अनुकूल अपने शरीर को ढालने का प्रयास करते हैं, जो हमारे नहीं हैं

मुझे पसंद हैं कूल्हें जो बहुत ज़्यादा चौड़े हों

वक्ष जो बहुत छोटे हों

बाहें जो बहुत लंबी हों

हाथ जो बहुत बड़े हों

मुद्राएँ जो बहुत फ़ैली हों

हाव-भाव जो बहुत बड़े हों

ऊर्जा जो बहुत ज़्यादा हो

उपस्तिथी जो ज़्यादा उपस्थित हो

मुझे यह औरतें बहुत पसंद हैं

अपने में मस्त

उनकी मुस्कुराती आंखों में चमकती दुनिया की परख

ऐसी दुनिया को देखने वाली, जो अभी तक उनसे पीछे है

ज़ोर से हंसने वालीं

पेट के अंदर से गड़-गड़ाने वाली हंसी

छाती को भारी करनेवाली, हंसी को दुगना करने वाली हंसी

अपनी खूबसूरती को हवाओं में फैलानेवाली हंसी

आप उन्हें स्वीकारें या न स्वीकारें  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

समीरा अय्यंगर एक रंगकर्मी  हैं, और एक कॉन्सेप्टुलाईज़र और उन कला-अनुभव की निर्माता हैं, जो लोगों को कला के करीब लाने और कला को लोगों के करीब लाने का प्रयास करती हैं। वह जुनून की सह-संस्थापक हैं, और वर्तमान में एस.एम.ए.आर.टी . की कोर्स डायरेक्टर हैं – थिएटर समूह के लिए क्षमता निर्माण पाठ्यक्रम भी बनाती  हैं।

 

 

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