अपने अफेयर्स की वजह से पूछना चाहती हूं कि आख़िर यह प्यार, आज़ादी और जवाबदेही है क्या?

ओलंपिका ओझा द्वारा 

चित्रण- विद्या गोपाल 

 

बचपन में अपने आसपास मैंने जो भी देखा, उसी से रोमांटिक रिलेशनशिप की पहली फोटो मेरे दिमाग में खिंची गयी । मुझे याद है  वो एक अपमान और मारपीट से भरी तस्वीर थी, आखिरकार मैंने देखा भी तो वही था । मैंने इस दर्द भरी हक़ीक़त का सामना अपने कमरे और दिमाग, दोनों की सिटकनीयां बंद कर , अपने दिमाग में 90 के दशक की फिल्मों में दिखाय जानेवाले  रोमांस की कल्पना करके मन भला कर किया । और यही सोचा कि जिस तरह राज और सिमरन ने गाने पर रोमांस किया था, “तुझे देखा तो यह जाना सनम”, और बर्फ में डांस किया था और जिस तरह से उन्होंने सारी मुसीबतों का सामना करके बाबूजी को मजबूर कर दिया था, यह कहने के लिए कि, “जा सिमरन, जी ले अपनी जिंदगी”… मुझे लगा कि इसी तरह कोई  मुझे भी इन सारी परेशानियों से बहुत दूर ले जाने के लिए आ जाएगा। जब मेरा पहला बॉयफ्रेंड मेरी जिंदगी में आया और हम गुवाहाटी- शिलांग हाईवे पर ड्राइव के लिए गए, तब पहली बार मैंने अपने आप को महसूस किया था और ट्रैवल के लिए अपने प्यार को महसूस किया था । पहली बार यह लगा कि आज़ादी क्या है, अकेले घूमना क्या है और क्या है …बंधनों भरे जीवन से आज़ाद होना ।  

वह 8 साल लंबा रिश्ता एक दिन खत्म हो गया, बहुत बुरी तरह, बहुत सारे दर्द के साथ जो हर लेवल पर था । फिर एक दिन मेरा दूसरा रिश्ता भी खत्म हुआ… इस बार वजह थीे बॉयफ्रेंड की मां जो मुझे और मेरे परिवार को हर जगह नीचा दिखाती थीं । मैं उसके इस बर्ताव के खिलाफ खड़ी होती थी । जब मैंने अपने बॉयफ्रेंड से कहा कि शादी के बाद मैं उनके साथ नहीं रहूंगी तो मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे बहुत ही गुस्से के साथ कह दिया कि “जाओ  रखो अपनी आजादी” जैसे कि आज़ादी मांगना ही वजह थी हम लोगों के अलग होने की।(उसे पहले से ही मेरे काम से बहुत प्रॉब्लम थी क्योंकि उसमें बहुत सारी लंबे समय की ट्रैवलिंगज़् शामिल थी और वह भी अनप्लांड ( unplanned) । उसको लगता कि इस वजह से मैं चौबीसों घंटे हमारे “होने वाले” परिवार की सेवा में नहीं रह सकूंगी ।) इस घटना ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या अपनी इच्छाओं के लिए, अपने चुनाव के लिए मैं उसे जवाबदेही रखती थी ? और क्या “जवाबदेही”  बहुत ही  पोलाइट/ शिष्ठ तरीका नहीं है, किसी को कंट्रोल करके रखने का ? क्या किसी के साथ रिश्ते में होने का मतलब यह है कि अब मुझे अपनी आज़ादी कभी नहीं मिलेगी और क्या जवाबदेही का एक मतलब यह होता है कि आप मुझ पर हुकूमत कर सकते हैं ? क्या जवाबदेही ऐसी नहीं हो सकती जिसकी वजह से रिश्ते आगे बढ़े ,जो सकारात्मक हो और आपसी सहमति से बने । मैंने अपना पूरा मन बना लिया कि मैं लोगों से इस बारे में बात करूंगी और यह जानना चाहूंगी कि उनके अनुभव कैसे रहे और उन्हें क्या लगता है इस बारे में ।

एक रिश्ते में आज़ादी का क्या मतलब है ?  सोफिया जो कि 29 साल की है और एक एन.जी.ओ. में काम करती है उसने कहा कि, “जहां पर एक इंसान के विचारों की, उसकी इच्छाओं की और उसके चुनाव की इज़्ज़त हो और उन्हें स्वीकारा जाए। जहां पर ईमानदारी हो और खुलकर बात की जा सके ।  जहां पर यह महसूस हो कि बहुत ही सकारात्मक संतुलित तरीके से 2 लोग एक दूसरे पर निर्भर करते हैं, लेकिन उनके पास व्यक्तिगत स्वतंत्रता है। और सबसे जरूरी चीज, यह जगह ऐसी हो जहां पर आप अपनी तरह रह सकें, आप अपने आप को चुनौती दे सकें और अपने आप को और निखार सकें।”

अलबेली के लिए आजादी का मतलब कभी-कभी मिलनेवाला एकांत है। अलबेली 22 साल की एनिमेशन आर्टिस्ट और ग्राफिक डिजाइनर है । उसका कहना है  की “कभी-कभी मैं अपनी इन्सिकयोरोटी की भावना को अकेले में, खुद समझना चाहती हूं। मुझे लगता है ऐसा करने से मैं अपने सारे रिश्तों में दूसरे को, थोडे आराम से सांस लेने की जगह ज़रूर छोड़ती हूं।”

सोनल 31 साल , एक फिल्म मेकर और सोशल एक्टिविस्ट भी है। उसके लिए आज़ादी का मतलब केवल भावनात्मक आज़ादी नहीं है, क्योंकि वह एक समय पर कई लोगों के साथ रहना पसंद करनेवाली बाई-सेक्सुअल औरत है। सोनल के लिए आज़ादी का मतलब है घिसे-पिटे तरीके से एक ही इंसान के साथ प्यार के बंधनों में ना रहना। उसने यह भी बताया कि जब वह कभी किसी के प्यार में होती थी तब भी उसे किसी और के लिए फीलिंग आ ही जाती थी। ऐसे में वह उस प्यार को लेकर सवाल करती थी कि, “क्या यह सचमुच में प्यार है ? और अगर मैं किसी एक से प्यार करती हूं तो दूसरे के लिए मेरे अंदर भावना ही क्यों आ रही है ? यह सब सोचना सिर्फ तब रुका जब मैंने यह समझ लिया कि मैं एक्चुअली बहुपतित्व (एक टाइम पर बहुत से लोगों का साथ पसंद करने वाले लोग))  हूं । लेकिन एक बार मैं एक व्यक्ति के साथ कमिट हो गई थी, तब मैंने उसके सामने एक दूसरे लड़के पर मेरे क्रश होने की बात कर दी थी तो उसने मुझे इतना सुनाया …इतना सुनाया कि बस । लेकिन पॉली वाली सिचुएशन में मैं किसी के भी साथ सो सकती हूं और फिर बाद में मेरे बाकी साथियों से इस बारे में बात कर सकती हूं । इस तरह के रिश्ते में बहुत खुलापन है ।”

लेकिन भाई मेरा क्या? मैं तो एक ऐसी लड़की हूं जो एक ही आदमी से खुश हो जाती है। मेरा अपना क्या विचार है आज़ादी को लेकर ? देखो जब मैं टीनएजर थी तो मेरे लिए आज़ादी का मतलब था कुछ ऐसा करना जो मेरे मम्मी-पापा मुझे करने से रोकते हैं । सिर्फ अपना विरोध दर्ज करने के लिए मैंने अपने लंबे काले बालों को कटवा दिया क्योंकि मेरी मम्मी को वो बहुत अच्छे लगते थे और ऐसा करके मुझे लगा कि यह आज़ादी है।लेकिन अब मेरे लिए कुछ भी करने की क्षमता आज़ादी है, लेकिन बिना किसी गुस्से या  बदले की भावना के । अगर बालों की बात हो तो कुछ भी करना सिर्फ मज़े के लिए, या एक नए लुक को ट्राय करने के लिए । मेरे हिसाब से एक रिश्ते के अंदर आज़ादी का मतलब है , दूसरा मुझे पूरी तरह से स्वीकार करे, मैं भी उसे । यानी …अगर मैं वैसी नहीं हूं जैसा कि मेरे साथी ने मेरे लिए अपने मन में ही सोच लिया है … अगर में उतनी अच्छी नहीं भी हूं तो भी मुझे यह डर नहीं हो कि वो मुझे इस वजह से छोड़ देगा या अपने मन की करने से रोकेगा। माना मैं हमेशा ऐसा नहीं महसूस कर पाती और अब भी मुझे मेरे पार्टनर्स के छोड़े जाने का या धोखा दिए जाने का डर सताता है, लेकिन मैं धीरे-धीरे इसे काबू में करना सीख रही हूं। यह मेरी अभी तक की जिंदगी के सफर में मुझे आज़ादी महसूस करवाने-वाला सबसे खूबसूरत पड़ाव रहा है। 

वो इंसान जिसे पाने के बाद मुझे लगा था कि मुझे आज़ादी मिल गई है, उसने मुझे सिर्फ इसलिए मारा क्योंकि मैं उसके अपार्टमेंट से एकबार अकेली बाहर चली गई थी। उस दिन मेरे अंदर से कुछ खत्म हो गया…मेरे अंदर से वह हिस्सा खत्म हो गया था जो उसके साथ में रहने से पनपा था। वह मुझे तो काबू में रखना चाहता था लेकिन वह मेरी लिए अपनी जवाबदेही समझा ही नहीं – जो कड़वाहट उसके शराब पीने की लत से हमारे रिलेशनशिप में आई थी उसके लिए वो कभी जवाबदेह हुआ ही नहीं।

मैं तड़पती रही उसके प्यार के लिए, उसकी छुअन के लिए और उस दिन के लिए जब वो मुझे समझता। मुझे लगता था कि यह सब तो मुझे मिलेगा ही, पर मुझे इनमें से कुछ नहीं मिला। हमारे रिश्ते में जवाबदेही का भार मुझ पर ज़्यादा था और आज़ादी उसके हिस्से में ज़्यादा थी । लेकिन लोगों से बात करके मुझे पता चला कि मैं अकेली नहीं थी जो इस गलत रेश्यो को सही करने की कोशिश कर रही थी, जो यह चाह रही थी की जवाबदेही अगले पर भी हो…ऐसा चहनेवाली और भी कई लड़कियां हैं।

नाना 27 साल का एक इंजीनियर है और उसने बताया कि उसकी पिछली गर्लफ्रेंड ने उसे धोखा दिया था। सबसे दुख देने वाली बात यह थी कि उसने आखिर तक यह नहीं बताया था कि वह उसके लिए क्या महसूस करती है। अभी उसके बारे में वह बहुत ही इमोशनल होकर बताते हैं , “अरे मेरे साथ इतने साल तक थी वह। तब भी नहीं पता चला कि ऐसा कुछ हो चुका है। मैं क्या था उसके लिए ? “ उन्हें लगता है कि रिश्ता बनाने के ख्याल से ही यह मतलब निकलता है कि आपकी जवाबदेही होगी ,अगले इंसान के लिए । ऐसा नहीं हो सकता कि आप किसी के साथ रिश्ते में हैं  और फिर आप कहें कि आपका कोई लेना देना नहीं है या कि आप ऐसे सोचें कि आपके जो भी काम हैं, उससे अगले पर्सन का कोई लेना देना नहीं है । उस लड़की ने भावनात्मक स्तर पर कोई जवाबदेही नहीं समझी और भावनाओं को लेकर भी वो ईमानदार नहीं थी … इसी वजह से यह रिश्ता नहीं चला ।”

मंदाकिनी, 27 साल की फिल्में मेंकर । उसका भी यही कहना है कि आपको भावनाओं  के प्रति कुछ ना कुछ ज़िम्मेदारी और जवाबदेही रखनी ही पड़ती है । उनका कहना है , “कुछ बहुत ही बेसिक चीजें हैं जो मैं  अपने साथी से एक्सपेक्ट करती ही हूं । जैसे कि जब मुझे उसके इमोशनल सपोर्ट की ज़रूरत हो , तब उसका वहां उपलब्ध होना या अगले को यह महसूस करवाना कि वो उसके लिए  कितना खास है, या अगले का ध्यान रखना।” अगर दो लोगों को साथ रहना है तो यह बहुत ज़रूरी है कि आप समझ लें कि आपको अपने मन कि बातें ज़ाहिर करनी होंगी। अपने ही दिमाग में कुछ सोचना नहीं है बल्कि खुलकर बात करनी है।”

सोनल के लिए जवाबदेही का मतलब है , रिश्ते में अधिकार पर सवाल उठाना, उसे समझना है । ये आप मन ही मन में भी कर सकते हैं।”आखिर आपके साथी को चोट पंहुच सकती है”  उन्होंने कहा “और गुस्से में आप अपनी इस शक्ति का उपयोग कर अगले को चोट पहुंचा सकते हैं । यह चोट देने की शक्ति, कभी कभी चोट देने वाले को एक बडी विकृत सी खुशी देे जाती है, और अगर इसे समय रहते आप ना समझे तो इसकी आदत भी पड़ सकती है।” उसका मानना है कि हर एक को अपने आप जवाबदेही समझनी चाहिए जैसे कि सोफिया का भी कहना था कि उसने खुद अपने आप को अपने साथी के प्रति जवाबदेह माना है और ऐसा ही उसके साथी ने भी किया है । ऐसा ही कुछ मंदाकिनी भी समझती है , उसका मानना है कि अगर आप खुद अपने आप को जवाबदेह  महसूस करते हैं और आपने खुद जवाब देना चुना है, तो ठीक है, लेकिन यह गलत तब है जब आप पर यह थोपा जाए।

मंदाकिनी को लगता है कि छोटी- छोटी चीजों का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है- जैसे कि आप तमीज़ से पेश आएं, आप जिम्मेदार रहें। जैसे – अगर आप किसी के साथ रहते हैं, तो उन्हें मोटे तौर पर बता के रखें कि आप कहां हैं। ख़ासकर अगर आप लंबे समय के लिए बाहर जाने वाले हैं तो। हां! उन्हें भी लगता है कि औरतों से कुछ ज़्यादा ही अपेक्षा रखी जाती है कि वह रिश्तों में जवाबदेह रहें । उसे यह भी लगता है कि औरतों को कुछ ज़्यादा ही नियमानुसार चलना पड़ता है। औरतों को लेके बड़े नियम हैं,उनके बर्ताव को लेके, उनकी सोच को लेके, उस पर कि वो ज़्यादा आज़ाद ना हों,वगैरा। इस तरह की गलत अपेक्षाएं  ही उनके पिछले दो रिश्तों के आड़े आई थीं। इसलिए अब उन्हें लगता है कि समाज औरतों को रिश्तों में ज़्यादा जवाबदेह मानता है। ख़ासकर आदमी और औरत के रिश्तों में तो औरत की जवाबदेही आदमी से कहीं ज़्यादा मानी जाती है। फिर चाहे वह जवाबदेही शारीरिक हो या भावनात्मक। ऐसे बर्ताव से लगने लगता है कि आपको काबू में किया जा रहा है। क्योंकि सारी अपेक्षाएं बस एक तरफ से आती हैं। जेंडर को लेकर बड़े सारे टेढ़े मेढे विचार हैं और उन विचारों पर कोई सवाल भी नहीं किये जाते हैं । जो इन परिस्तिथियों को जानते हैं, अक्सर उन्हें यही लगता है कि जवाबदेही के नक़ाब में उनको कण्ट्रोल किया जा रहा है।

वैसे नाना को यह नहीं लगता है कि रिश्तों में औरतों से ही ज़्यादा जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने बताया कि उनकी एक एक्स थी और वह उन्हें इसलिए छोड़ कर चली गई थी क्योंकि उसे यह महसूस होता था कि उनके रिश्ते में उस लड़की की जवाबदेही कुछ ज़्यादा ही थी। नाना ने बताया कि “वह शहर से बाहर रहती थी तो जब वह रात को देर तक पार्टी करती थी तो मैं थोड़ा चिंतित हो जाता था । और एक दिन अचानक उसने फेसबुक पर अपने एक पुराने बॉयफरेंड की फोटो अपने साथ में अप-लोड कर दी। जब मैंने उससे पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया तो उस लड़की ने जवाब दिया कि , “मैं तुम्हें बताना ज़रूरी नहीं समझती हूं ।”

फिर जैसे अपनी कहानी पर सोचते हुए वो खुद ही आगे कहते हैं, कि उन्होंने भी एक ज़रूरी बात अपनी गर्लफ्रैंड को नहीं बताई थी- यह कि वो नशीली दवाओं का सेवन करते थे। उस लड़की को इस बारे में पता नहीं था। इस बात को छिपाने पर उसे अब भी बहुत ग्लानि है। नाना ने अपनी गर्लफ्रैंड से ईमानदारी की उम्मीद रखी, आज उसे ये अहसास हो रहा था कि उसने भी अपनी पूरी

सच्चाई उंसके सामने नहीं खोली थी।

लेकिन क्या रिश्ते में ये दोनों साथ रह सकते हैं? आज़ादी भी और जवाबदेही भी? मंदाकिनी को लगता है कि ऐसा तब हो सकता है जब आप जानते हो कि आपके साथी को क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं; और यह जानने के बाद वो ना करना से, जो उसे अच्छा नहीं लगता। मंदाकिनी को लगता है कि ऐसा हो सकता है, जबकि सोनल की राय अलग है। सोनल को लगता है कि रोज़ मर्रा की जिन्दगी में ऐसा करना मुश्किल है। “मुझे लगता है कि बोलने के लिए यह बहुत आसान है,  लेकिन ऐसा वाकई में होता नहीं,” सोनल ने कहा। साथ ही यह भी जोड़ा, “जब में किसी रिश्ते में होती हूं तो मैं जो जी चाहे करना चाहती हूं, जिससे चाहूं मिलना चाहती हूं, अपने शरीर पर अपना अधिकार चाहती हूं, लेकिन असल में जलन और असुरक्षा आ जाती है। तो आप कभी भी कहीं भी उठके नहीं जा सकते। आपको अपने पार्टनर का भी तो कहीं ना कहीं ध्यान रखना होगा ।”

सोनल में एक ऐसे प्रोजेक्ट के बारे में बताया जहां उन्हें 15 दिन के लिए बाहर जाना था। तब उनके पार्टनर ने उन्हें इतने समय के लिए एक बार में जाने से मना कर दिया और उस एक यात्रा को छोटे-छोटे ट्रेवल्स में बदलने को कहा। “ऐसा करने से मेरे काम पर तो फ़र्क़ पड़ा ही।  लेकिन मैं अभी-तक ये भी साफ़ साफ़ समझ नहीं पाई कि क्या ये सब मांग कर मेरे साथी ने मेरी ज़िंदगी में खलल की थी या नहीं?” सोनल आप अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपने साथी से जवाबदेही मांगते हो। ऐसा करने पर ना चाहते हुए भी आप अपने साथी पर पाबंदियां लगाने लगते हो ।

हम सब अपने रिश्तों में थोड़ी स्वतंत्रता चाहते हैं, अपने  लिए और अपने सपनों के लिए भी । लेकिन अपने साथियों को यह कैसे समझाएं ? “रिश्तें में आज़ादी पाने के लिए आपसी निर्भरता का ही ध्यान रखना होता है,” सोनल ने कहा। “आपको अपने परिवारों से अच्छे रिश्ते रखने होंगे और अपने-अपने दोस्तों से भी ऐसे रिश्ते निभाने होंगे जिनमें केवल आपकी दोस्ती है,आपके पार्टनर की नहीं। अपने दोस्तों से मिलने के लिये अपने साथी को एनकरेज भी करना होगा। एक और ज़रूरी बात : आपके साथी आपके पिता, मां या सलाहकार सबकुछ नहीं हो सकते – वो केवल आपके साथी हो सकते हैं। आपको इन सब चीजों को मिलाना नहीं है। यही सबसे अच्छा तरीका है आज़ादी रखने का, ऐसी आज़ादी जिसमें जवाबदेही भी हो। तभी यह दोनों चीज़ें एक साथ हो सकती हैं।”

इन सारी बातों से मुझे पता चला कि हम सबकी जवाबदेही और आज़ादी की डेफिनेशन हमारे अपने व्यक्तित्व और अनुभवों से निकल कर आती है। इसकी कोई बनी बनाई रूप-रेखा नहीं है कि रिश्ते कैसे होने चाहिए। “

अपने रिश्तों में शुरू में मैं सोचती थी कि मेरे साथी मेरे लिए वैसे ही जवाबदेह हों, जैसे मैं चाहतीं हूंं। जैसे – जब मैं चाहूं तब उन्हें मुझे मिलना ही चाहिए, और मेरी सोच से वो सहमति ना रखें तो मुझे लगता था कि वो मुझसे प्यार ही नहीं करते, या मैं अपने आप पर ही शक करने लगे जाती थी। लेकिन अब मुझे समझ आता है कि यह सब कितना गलत था।अब मुझे पता है कि लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है  और उनमें तब भी गहरा आपसी प्यार हो सकता है। हमारी एक-दूसरे को लेकर इच्छाएं अपेक्षाएं कभी कभी टेडी मेडी भी हो सकती हैं ।और यह ज़रूरी भी नहीं कि सबकुछ आसान हो। जब मैंने लोगों से बात की तो इस चीज़ों को लेकर मेरी सोच में थोड़ी मैचोरिटी (maturity) आई, जो शायद अपने विचार ही सीमित रखती तो नहीं आती। लोगों से बात करके, उनके अनुभव जानकर मेरे विचारों में एक विस्तार आया। लोगों से बात करके मुझे पता चला कि एक सफल रिशते के लिए, माफ करना, बातों को पकड़कर ना बैठना और अपने साथी (साथियों) से एक दूसरे की आकांक्षाओं को लेकर स्वस्थ बात-चीत करना कितनी ज़रूरी है ।

 

*नाम बदलकर दिया गया है

Comments

comments

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *