पॉर्न से पाए विचित्र विचार

अनुवाद – मिहीर  सासवडकर

हम में से ज़्यादातर लोगों की पॉर्न से मुलाकात, हमारी युवा ज़िंदगी में कभी न कभी होती ही है। हम में से कुछ को वो बहुत पसंद आया होगा। दूसरों को वो शायद इतना ना आया हो, हम वो वीडियो देखने के बदले कामुक साहित्य पढ़ना पसंद करते हों। यह जानने के बाद कि पॉर्न असली ज़िंदगी के सेक्स से कितना विभिन्न है, कई लोग पॉर्न देखना बंद भी कर देते हैं।

लेकिन तब क्या होता होगा जब पॉर्न आपके सेक्स की शिक्षा का एकमात्र ज़रिया बन जाता है? क्या वो आपके दिमाग का फालूदा बना देता है, उसमें बावले विचार भरकर? आपको ऐसा सोचने में मजबूर कर देता है कि सेक्स वैसा दिखना और लगना चाहिये जैसा उस पिक्चर में था जो आपने तब छिपकर देखी थी जब आप १४ वर्ष के थे? क्या ऐसा लगता है कि जब कोई कामोन्माद पहुँचता है तब ऐसी आवाज़ें सुनाई देती हैं मानो उसका कत्ल हो रहा हो? यहाँ, हमनें सेक्स के बारे में उन सबसे बावले या सिर फिरे मिथकों का भांडा फोड़ने की कोशिश की है जिन्हें पॉर्न देखने वाले मासूम लोग सच मानने लगते हैं।

मिथक १: लिंग मतलब बड़ा 

रोहित, २६, पॉर्न से मिले अपने सबसे बड़े डर का जिक्र करता है, ऐसा डर जो वास्तव में बहुत लोगों को हैं – वो पेचीदा सवाल कि शिश्न की लंबाई आख़िर कितनी अहम बात मानी जाती है। “अगर आप आदमी हो तो, पॉर्न आपको अपर्याप्त, छोटे शिश्न होने की हीनभावना दे जाता है । आपको शुरू से ही ऐसा लगने लगता है कि अगर आपका शिश्न ८ इंच का नहीं है तो आप कहीं के नहीं हो”। माधवी, २४, इससे सहमत है। वो कहती है, “मैंने जितना भी पॉर्न देखा है, उस सब में पुरुषों के शिश्न बड़े थे”। “जब मैंने बहुत बड़े शिश्न वाले आदमी के साथ सेक्स किया तब मैं जान गयी कि उस स्थिति में दर्द हो सकता है और अक्सर होता भी है। बड़ा शिश्न होने से और एक तकलीफ़ पैदा होती है, और वो यह कि आपको और कामोत्तेजित होना ज़रुरी हो जाता है। मुझे छोटे शिश्नों को संभालना और आसान लगता है। आप सेक्स के दौरान कई और चीज़े कर सकते हो, क्यों कि शिश्न कम फिसलता है – वो इतने बार बाहर नहीं निकलता”।

और हाँ, वह सिर्फ शिश्न की लंबाई ही नहीं है जिसे पॉर्न ने ग़लत तरीके से दिखाया है। पॉर्न में दिखाया गया ‘उत्तम’ योनिमार्ग अक्सर मुंडा हुआ होता है, उस पर एक भी बाल नहीं होता, और भग-शिश्न अति गुलाबी रंग के या फिर हल्के रंग के होते हैं। वास्तव में भग-शिश्न सभी आकार, माप और रंगों में आते हैं। औरतों का योनिमार्ग कामोत्तेजित होने पर गीला हो जाता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वो अंधेरी में बारिश के दिनों की बाढ़ जैसा दिखने लगे। औरतों को सेक्स के पहले फोरप्ले या लूब्रिकंट की आवश्यकता हो सकती है। पॉर्न “स्क्वरटिंग” को भी बहुत अहमियत देता है, उस समय जब एक औरत कामोन्माद के दौरान रस की फुहार मारती है। असलियत में बहुत कम औरतें यह करती हैं। (यह रही एक मजेदार जानकारी। UK ने अपने पॉर्न में स्क्वरटिंग पर रोक डाली है, और किसी को पता नहीं है क्यों।) “एक बार मैंने ग़लती से स्क्वर्ट किया, लेकिन वह बिल्कुल ही कामुक नहीं था। ऐसा लगा कि मेरा योनिमार्ग पाद रहा था। मैं बड़ी ज़ोर से हँसने लगी। मेरा बायफ्रेंड बोला ‘हँसों मत, यह बहुत कामुक बात मानी जाती है’, और मुझसे वो वापस करवाने की कोशिश की, चूंकि उसने पॉर्न में वो देखा था और उसे अच्छा लगता था। लेकिन मैं वो फिर से नहीं कर सकी”, तन्वि याद करती है। वो इस बात पर दो साल बाद भी हँसती है।

मिथक २: मनुष्यों के बदन कैसे दिखते हैं

पॉर्न यह भी भूल जाता है कि औरतों के लिये शरीर के बाल भी एक सच्चाई हैं।यह जानने पर  निराश होकर युवा प्रेमी एक दूसरे से बेवकूफ चीज़ें करवा बैठते हैं। १८ वर्षीय तारा कहती है कि उसके पहले बायफ्रेंड ने पॉर्न देखने की वजह से मन में यह ठान लिया था कि लेबिया (भगोष्ठ) पर बाल घिनौने दिखते हैं। इसलिये उसने तारा को उधर बाल मुंडाने को कहा था। “मैंने पार्लर में जाकर ‘ब्रझिलियन वॅक्स’ करवाया। यह इसलिये नहीं कि वो उससे ख़ुश हो जायेगा, पर इसलिये कि मुझे लगा कि वैसा करने से मेरी कामुकता बढ़ेगी , मैं अपने को सेक्सी महसूस करूँगी”, वो कहती है। “पर मुझे अजीब लगा। वो जगह गंजी लगी। और जब बाल वहाँ पर फिर से उगे, तो कई दिनों तक मुझे वहाँ पर खुजली लगती रही”।

मिथक ३: सभी औरतें ओरल सेक्स करना पसंद करती हैं

और एक बात जिसे पॉर्न बिल्कुल नजरअंदाज़ कर देता है वो यह कि वास्तविक जीवन के ब्लो-जाब पॉर्न से अलग होते हैं। पॉर्न उन्हें यूं दर्शाता है कि एक औरत को मुँह से उत्तेजित करके उसे कामोन्माद दिलाना दुनिया की सबसे आसान बात है, और उसे करने में सिर्फ ३ मिनट लगते हैं, जब कि असल में ३० तक लग सकते हैं।

पॉर्न देखने से आपको ऐसे भी लग सकता है कि हर औरत को ब्लो-जाब देना पसंद है, जो शायद सच ना हो। “पॉर्न में, लगभग सभी लड़कियाँ शिश्न को मुँह में ४० मिनट तक लेती हैं। असलियत में वैसे नहीं चलता। हर एक लड़की का उसके प्रेमी को मुँह से उत्तेजित करने का अपना तरीका होता है”, सतीश कहता है। और फिर पॉर्न से आया हुआ ‘थूकना या निगलना’ का भी मिथक है, कि आदमी के वीर्य को निगलना उसे थूकने से और कामुक होता है। अम्रिता, २९, कहती है, “किसी के मुँह में वीर्यपात करना अप्रिय और खीझ दिलाने वाली बात है। लेकिन पॉर्न देखने से पुरुषों को लगता है कि यह बात औरतें बहुत पसंद करती हैं। और जिन औरतों को यह नापसंद हैं उन्हें लगता हैं कि वो कुछ ग़लत कर रहीं हैं।

 

मिथक ४: सेक्स मतलब पेनेट्रेशन 

कभी कभी, मसला यह बन जाता है कि पॉर्न को लगता है कि सेक्स का मतलब केवल पेनीट्रेशन ही है।

माधवी कहती है, “पॉर्न के सभी वीडियो में पेनीट्रेशन शुरू होने पर औरतें ज़ोर से कराहने लगती हैं!”

पॉर्न में अधिकतर ध्यान पेनीट्रेशन पर दिया जाता है, जो अक्सर सेक्स के शुरू में ही होता है। यह बात कई लोगों को उबाऊ लगती है, जिनके लिये चुंबन और फोरप्ले सेक्स का सबसे ज़्यादा मज़ेदार हिस्सा हैं। लेकिन असली मज़ाक तो यह रहा।

अक्सर शिश्न को योनिमार्ग में घुसाना, खासकर जब आपने थोड़ी देर पहले ही सेक्स शुरु किया हो, बड़ा मुश्किल कार्य है। लेकिन पॉर्न उसे ऐसे दर्शाता है जैसे कि वो उंगली चूसने जितना आसान है। पुरुष होने के नाते आप कई बातों के बारे में परेशान हो सकते हैं। क्या आप अपने प्रेमी को दर्द पहुंचा रहे हो, क्या आपका शिश्न संपूर्ण रूप से कड़क है, और क्या वो योनिमार्ग के अंदर गया भी है कि नहीं। या फिर शायद आपके पास कंडोम नहीं हो (पॉर्न अक्सर गर्भनिरोध का उपयोग नहीं दिखाता क्योंकि वो इतना सेक्सी नहीं माना जाता है) और फिर आप सेक्स ना ही करने का निर्णय लेते हो। सतीश, २१, कहता है, “पहली बार सेक्स करना बहुत उलझन का मामला है क्योंकि आप अपनी शर्मिंदगी के साथ जूझ रहें होते हैं और सब सही करने की भी कोशिश करते हैं। और सन्दर्भ के तौर पर आपके दिमाग़ में बस पॉर्न का  झूठा सेक्स  होता है। असल में यूँ होता है: ‘क्या वो अंदर घुसा है?’ ‘वो क्यों अंदर नहीं जा रहा है?’ ‘ क्या आप उसे अंदर डाल सकते हो?’ ‘रुको, देखते हैं वहाँ तकिया डालने से कुछ फ़र्क पड़ता है क्या’”।

मिथक ५: सेक्स हरदम बिना कोई परेशानी के और ग़ज़ब का होता है

शिश्न के अंदर जाने के बाद भी, पॉर्न देखने से सेक्स करने की गति क्या होनी चाहिये इसके बारे में आपको अजीब विचार आ सकते हैं। असलियत में, सेक्स की गति तेज़ से धीरे से ऊबड़-खाबड़ में बदल सकती है, और शायद आपको कभी कभी फिर से शुरूआत भी करनी पड़े। एन, २७, की एक चिड़चिड़ी कहानी है पॉर्न के बारे में। “यह बात मेरे दो साल पुराने बायफ्रेंड के साथ हुई। जब हम दूसरी या तीसरी बार सेक्स कर रहे थे तब उसने कहा कि वो चाहता था कि मैं उसके उपर रहूँ। मैं शिश्न वाले सेक्स, जहाँ पेनीट्रेशन होता है – उसके बारे में अनिश्चित थी। इसलिये शायद मैं अनाड़ी जैसे पेश आयी। मिस्टर लवरमॅन बहुत निराश दिखाई दिया। मैंने उसे पूछा कि क्या हुआ और उसने कहा कि वो सेक्स से नाख़ुश था। तो मैंने उसे पूछा कि आम तौर पर सेक्स कैसे होता है। मैं तो ईमानदारी से पूछ रही थी, पर फिर मैंने उसका उत्तर सुना। ‘पॉर्न में औरतें बेहतर लय में सेक्स करती हैं’। मैं चौंक गयी और मैंने सोचा कि क्या यहाँ भरतनाट्यम का नृत्य चल रहा है? बाय बाय”।

लेकिन सभी लोग मिस्टर लवरमॅन जैसे नहीं होते, और आप सेक्स करने की ऐसी  लय बना सकते हो जो आपको सूट करती है । और अगर आपको ऐसा लगने लगे कि आप कसरत कर रहे हो ? क्या थक जाना ठीक है?

मिथक ६: आपके अलावा हर कोई सेक्स करने में व्यायामपटु है

पॉर्न देखने से आपको ऐसा लग सकता हैं कि आपको बड़ी देर तक सेक्स करना ज़रूरी हैं और आपको सभी मुद्राओं में सेक्स करने की कोशिश करनी होगी। आप अगर पुरुष हों तो आपको ऐसा लग सकता हैं कि आपको एक के बाद एक इरेक्शन आने चाहिये, और आप अगर स्त्री हों तो कम से कम तीन बार कामोन्माद के मुकाम पर पहुँचना  हैं। लेकिन वास्तव में कई औरतों को पेनीट्रेशन के सेक्स के ज़रिये कामोन्माद नहीं मिलता, और पुरुषों को अक्सर दो कामोन्माद के बीच ठहरना पड़ता हैं। कभी कभी आपको इसलिये भी ठहरना पड़ता हैं क्योंकि आप हांफ रहे होते हो। पल्लवी, ३८, मुझे कहती है कि उसका पार्टनर, जो ४७ साल का है, फ़िलहाल ही जिम जाने लगा है, और अब उन दोनों में सेक्स बहुत बदल गया है। पहले वो बीच में ही थक जाता था। “हम सेक्स कर रहे होते, वो मेरे ऊपर होता, और अचानक वो एक तरफ हो जाता और उसे देखने से किसी को लगता जैसे दुनिया खत्म होने वाली है। फिर मुझे उसके ऊपर चढ़ना पड़ता, और उसे धूम्रपान बंद करने को और कसरत शुरु करने को कहना पड़ता। अगर मैं पॉर्न में विश्वास करती, तो मैं मेरे पार्टनर को एक निकम्मा मोटा मान कर कब का छोड़ देती”।

मिथक ७: सेक्स के दौरान शोर होना ज़रूरी है

पॉर्न के बारे में सब लोगों की जो एक शिकायत है वो यह है कि सबको नकली आवाज़े निकालनी पड़ती हैं ताकि उनके पार्टनर को पता चले कि उनको बड़ा मज़ा आ रहा हैं। “मैं बहुत शांत लड़का हूं, और मैं बिस्तर में बिल्कुल ही कराहता नहीं हूँ। और मेरे साथ जो लड़की होती है उसे अक्सर अजीब लगता है और वो मुझे पूछती है कि क्या मुझे अच्छा नहीं लगा। मुझे १०० प्रतिशत पता है कि यह इसलिये हो रहा है कि पॉर्न में आदमी घुरघुराते हैं और कामोत्तेजित करने वाली बातें करते हैं”, निशांत, ३३, कहता है। वो सेक्स के दौरान आवाज़ करने के इस दबाव में आने वाला अकेला नहीं है। पॉर्न देखने से औरतों को भी यह विचित्र विचार आ सकता है कि पागल की तरह लगातार कराहना महत्तवपूर्ण है, नहीं तो सेक्स में आपकी निपुणता कच्ची  हैं। ऊषा, २७, कहती है कि १५ साल की उम्र में पहली बार किये गये सेक्स के बारे में उसे बहुत कम याद है, लेकिन उसे शोर याद है। “जब मैंने पहली बार सेक्स किया, तब मुझे लगा था कि बहुत आवाज़ होनी चाहिये। इसलिये मैं बहुत ज़्यादा कराहने लगी। हांफने लगी जब मुझे असल में हांफना नहीं था”। एस, २५, कहती है कि उसे लगता था कि बहुत कराहना ज़रूरी था, और चूचुक पकड़ने जैसी हरकतें करना ज़रूरी था, चूंकि पॉर्न में “औरतें वहीं करतीं हैं”।

औरतें क्या करती हैं यह तो एक बात रही। लोग क्या करते हैं, पॉर्न, उसके बारे में भी अजीब विचार रखता है। तो यह रहा सबसे अनोखा मिथक। पॉर्न देखने से आपको लगेगा कि किसी भी कारण किसी के घर प्रस्तुत होकर, और दरवाज़े पर थोड़ा हिलकर, थोड़ा हिचकिचाकर आपको सेक्स करने का मौका मिल जाएगा।

मिथक ८: सेक्स कैसे मिले

२९ वर्षीय अभिषेक कहता है, “अमरीकी पॉर्न देखने से मुझे जो सबसे बड़ी दिक्कत हुई वो यह कि अरसों तक मुझे लगता रहा कि पिझ्झा डिलिवरी बाय, प्लंबिंग और टी वी रिपेयर वाले का काम करने से सच में किसी को कामोत्तेजक सेक्स मिलेगा”।

ठीक है अभिषेक, तुम्हारे कुचले हुए व्यावसायिक सपनों से हमें कुछ लेना देना नहीं हैं। हम यह नहीं कह रहें कि पॉर्न देखना बंद करो। वो ज़रूर खुशी का साधन बन सकता है। पर यह सच है कि पॉर्न देखने से आपको खुशी के बारे में और किसी को कैसे खुशी दी जाए इसके बारे में कई अजीब विचार आ सकते है। असली ज़िंदगी में सेक्स, बाकी बातों जैसा, मैला, शांत और बालदार हो सकता है। वो इसलिये कि पॉर्न एक पिक्चर है, अभिनेताओं के साथ। और असली ज़िंदगी असली ज़िंदगी है।

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