‘ना’ कैसे करें- लीजिये AOI गाइड की मदद 

जब आप किसी के साथ डेट पर जाएं या किसी के साथ संबंध में हों, तो कुछ ना करने की इच्छा होने पर, ‘नहीं’ कहना आसान होना चाहिए। है ना?

लेकिन हम सभी जानते हैं कि असल में, ये मुश्किल होता है। ना कहने के बाद, या तो आप अजीब महसूस करने लगते हैं, या फिक्र करने लगते हैं। कभी आपको राहत महसूस होती है तो कभी आप खुद को दोषी मानने लग जाते हैं। कभी-कभी आप वाकई बड़े तीखे और असंवेदनशील हो जाते हैं। और इस कोशिश में कि ऐसे ना हों, अपनी बात साफ-साफ बयान ही नहीं करते!

ऊपर से हमारे यहां डेटिंग को लेकर कुछ ऐसा माहौल बना है जिसमें हर वक़्त कूल(cool) रहना होता है, हर बात के लिए तैयार। और अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें दकियानूसी समझा जाता है। ऐसे में हम सचमुच क्या चाहते हैं, उसके बारे में ईमानदारी से बात कर पाना मुश्किल हो जाता है।

हाँ, ये मुश्किल हो सकता है, लेकिन हमें इसका हल निकालना पड़ेगा। समय आ चुका है, जब हम इन चीजों के बारे में ज्यादा और खुलकर बात करें। यहां हम कुछ ऐसी परिस्थितियों की चर्चा करते हैं जिनमें शायद आपको “ना” कहने की इच्छा हो। और इस पर भी कि ऐसे हालात में “ना”  कैसे कहा जाए। 

  1. जब आप बिल्कुल दिलचस्पी नहीं रखते हैं

जब कोई आपको डेट के लिए पूछता है, लेकिन आपको बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है, तो बड़ी विनम्रता से ना कह दें।  अगर स्थिति ऐसी नहीं है कि डराने- धमकाने की ज़रूरत पड़े, तो थोड़े दयालु अंदाज़ में ना कहना नुकसान नहीं पहुंचाएगा। साधारण सा कुछ जैसे, “थैंक यू, लेकिन मैं आप में उस तरह की दिलचस्पी नहीं रखती हूँ,” – ठीक रहेगा।

अगर फिर भी वो लगातार कोशिश करते रहते हैं और आपकी बात को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो भी यही कहते रहें – विनम्रता से, लेकिन दृढ़ता के साथ।

 

  1. जब आप समीकरण (equation) बदलना नहीं चाहते हैं

आपका एक अच्छा दोस्त है। चीज़ें जैसे चल रही हैं, आप उस से खुश हैं, लेकिन उसे इस रिश्ते से कुछ और भी चाहिए। यह स्थिति पेचीदा हो सकती है। क्योंकि आप उसे नाराज़ नहीं करना चाहते हैं। अगर आप ये सोच रही हैं कि, “मैं इस आदमी की एक दोस्त के तौर पर तो इज़्ज़त करती हूँ, लेकिन इस रिश्ते को और आगे नहीं ले जाना चाहती हूँ”, तो आपके लिए अच्छा ये रहेगा कि आप अपनी भावनाएं ईमानदारी से उसके सामने रख दें। और जरूरत पड़े तो उसपर अड़े रहें। हो सकता है इस से उसे थोड़ी बहुत चोट पहुंचे। लेकिन बातों को गोल-गोल घुमाने से, अपने जवाब को रस में घोल कर पिलाने से या उनको गुमराह करने से कुछ हासिल नहीं होगा। जैसे कि, उसे हिंट देना कि आप अभी तो इंटरेस्टेड नहीं हैं, लेकिन हो सकता है कि बाद में इंटरेस्टेड हो जाएँ। जबकि आपको पता है कि ऐसा कुछ नहीं होगा। तो उसे झूठी तसल्ली देकर आप उसका कोई भला नहीं करेंगी।

  1. जब आपको दिलचस्पी है, लेकिन आप तैयार नहीं हैं

जब आप किसी ऐसे इंसान के साथ हैं जिसे आप पसंद तो करती हैं लेकिन अभी आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं हैं। आप धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती हैं। कभी ऐसा हुआ हो कि आपका मन किया कि उसे कहें कि, ‘इतनी जल्दी नहीं’। या उसे ‘ना’ कहना चाहें, लेकिन सिर्फ उस समय के लिये।

आपको इस बात की चिंता होगी कि अगर आपने ऐसा कह दिया तो उसे ऐसा ना लगे कि आप उस के ऊपर अपना धौंस जमा रही हैं। या कि इस से उसको ये ना लगे कि आपने उसको मना कर दिया है और वो आपको छोड़ के आगे बढ़ जाए। पर फिर भी सब साफ़-साफ़ बता देना भी तो ज़रूरी है। अगर वो आपकी भावनाओं की इज़्ज़त करता है तो आपकी बात समझेगा और आपको ज़बरदस्ती कुछ करने के लिए मज़बूर नहीं करेगा।

  1. जब आप प्यार के मूड में ‘ना’ हों

आप किसी के साथ रिश्ते में हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आप सेक्स या रोमांस करने के मूड में नहीं हैं। 

या फिर किसी और बात को लेकर परेशान हैं। तो ये कैसे कहें – “हम्म, अभी नहीं।”

कभी-कभी ऐसी बातें कहकर बताना जरूरी नहीं होता। अपने शरीर पर घूमते उसके हाथ को धीरे से हटाने से, या उत्तेजना भरे किस के जवाब में गाल पर हल्के से किस करने से भी हिंट दिया जा सकता है। कभी-कभी लोग अपनी ही एक भाषा बना लेते हैं जिससे कि सामने वाले को बात आसानी से समझ आ जाएं। लेकिन कभी-कभी इन इशारों को महज़ संकोच या शर्म मान लिया जाता है। या हो सकता है कि आपके सिग्नल उनको समझ नहीं आ रहा हो। ऐसे में आप साफ़-साफ़ कह सकती हैं कि- अभी मुझे ये सब करने का मन नहीं है। 

  1. जब आप किसी वज़ह से असहज हैं 

कभी-कभी ऐसा होता है कि आपको पता नहीं होता कि क्यों, लेकिन आप बस ‘ना’ कहना चाहते हैं, कुछ भी करना नहीं चाहते हैं। हो सकता है, कहीं आपको लग रहा है कि पावर या अधिकार बराबरी का नहीं है। आपको ऐसा लग रहा हो कि सामने वाला इस बात की कद्र ही नहीं करता कि आप क्या चाहती हैं (या क्या नहीं चाहती हैं)। या आपको ये महसूस हो कि वो ऐसी स्थिति का फायदा उठा रहा है जहां उसे पता है कि आपके लिए ना कहना मुश्किल है। कई बार ये स्थिति इसलिए पैदा होती है क्योंकि उसके लिए आपकी ‘ना’ मायने ही नहीं रखती है। जब हमारे संकोच या ‘ना’ के सिग्नल को नजरअंदाज कर दिया जाता है, तो हम अक्सर ‘नहीं’ बोलने का आत्मविश्वास खो देते हैं। लेकिन यहां सामने हो रही चीजों को खुद समझने की ज़रूरत है। (अगर सामने वाला जानबूझकर किसी चीज को लेकर आपकी असुविधा को अनदेखा कर रहा है, तो क्या सच में उसको आपकी भावनाओं की कद्र है?)। ज़रूरत है कि आप जो महसूस कर रहे हैं, उसे बताएं।  धीरे-धीरे ही सही, लेकिन जरूर बताएं।

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याद रखें, सहमति/कंसेंट K3G मूवी के अमिताभ बच्चन की तरह नहीं है – कि “कह दिया तो बस कह दिया” । मतलब, ये कोई पत्थर की लकीर नहीं है जिसे बदला ना जा सके। बल्कि, ये ऐसी चीज है जो कहीं भी, कभी भी, बदली जा सकती है। अलग-अलग रोमांटिक स्थितियों में या सेक्स के अलग-अलग पड़ाव पे। जैसे- पहल करने से लेकर सम्भोग क्रिया के बीच में, वन-नाईट-स्टैंड या नो-स्ट्रिंग्स-अटैच्ड ( no strings attached) या लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप्स में, कहीं भी। अगर मज़ा करना है, तो मर्ज़ी का होना ज़रूरी है। मर्ज़ी तो मिनिमम है! जिस समय हमें महसूस हो, ठीक उसी समय ‘ना’ बोल पाना, ये भी एक हुनर है, जो हमें सीखना चाहिए। और एक बात और: जैसे हम चाहते हैं कि जब हम ‘ना’ करें तो सामने वाला हमारी भावनाओं का सम्मान करे , ठीक वैसे ही हमें भी दूसरों की ‘ना’ को सुनना और मानना चाहिए।

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