बाल, यहाँ-वहाँ, हर जगह! बॉडी हेयर सर्वे

कवि येहुदी अमीचाई ने एक मायूस कविता की शुरुआत इन लाइनों से की: “मैं बड़ा बालदार हो चला हूँ । डरता हूँ कि मेरे बालों की वजह से वो  मेरा शिकार करेंगे।लेकिन कवि ग्रेगरी कोरसो ने बिल्कुल इसके विपरीत, ये लिखा,“ बिस्तर में आना और वो भी बिना बाल के, ये इतनी बड़ी चूक है जिसे सिर्फ भगवान ही माफ कर सकते हैं।हाँ, ये अलग अलग सोच सिर्फ कवियों तक ही सीमित नहीं है। हम सब शरीर के बाल को लेकर अपनी कुछ कुछ सोच रखते हैं। जैसे कि, हम बालों के मामले में में कूल (cool) हैं या नहीं, हम आकर्षक महसूस करते हैं या नहीं, हम लोकप्रिय हैं या नहीं, हम मॉडर्न हैं या नहीं? काफी हद तक, और ये चौंकाने वाली हद है, हम अपने को और दूसरों को शरीर पर बालों के ज़रिये अक्सर आंकते हैं यही वजह है कि हमनें ग्रेट इंडियन बॉडी हेयर सर्वे (Great Indian Body Hair Survey) का ऑनलाइन आयोजन किया।

इस सर्वे में हमने आपसे पूछा, कि क्या आप शरीर के बालों की परवाह करते हैं? हमें ऐसा लगता हैं कि आपको परवाह है, क्योंकि तीन सप्ताह के अंदर 665 लोगों ने इस सर्वे में भाग लिया। और आपके खुले और विचारशील जवाबों से हम इन नतीजों पे पहुँचे हैं।

1. बॉडी ब्रेकअप: आपका जेंडर और आपकी उम्र क्या है?

 कुल मिलाकर, 665 लोगों ने इस सर्वे में भाग लिया।

औरतों ने हर उम्र के ग्रुप में काफी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। हाँ, इसके कई कारण हो सकते हैं कि मर्दों की तुलना में ज्यादा औरतों ने सर्वे में भाग क्यों लिया। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि शरीर के बालों कोऔरतों का टॉपिकसमझा जाता है।  हमने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे दूसरे तरीके से पेश करने की कोशिश की थी ये माना जाता है कि शरीर पे बाल का ना होना एक औरत को सुंदर और कोमल  दिखाता है। जबकि बाल के होने पर लोग उन्हें मर्दाना मानते हैं। हालांकि ये सोच अब बदल रही है। हमारे सर्वे और खोज़ से तो यही पता चलता है।

सर्वे का जवाब देने वाले लोगों में अधिकतर की उम्र 18-32 की थी। बहुत कम लोग 50 से ऊपर की उम्र के थे। इसका एक कारण ये हो सकता है कि युवा लोग इस टॉपिक से ज्यादा रिलेट कर पाए। जवाब देने वाले मर्दों में 67% की उम्र 18-25 के बीच थी। इससे ये पता चलता है कि नई युवा पीढ़ी (Generation Z) के मर्द शरीर के बालों के बारे में ज्यादा सोचते हैं। और ये एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है।

2. आप कितनी बार अपने बाल हटाते हैं?

 होर्डिंग्स ( सड़क किनारे लगे विज्ञापन के बड़े बोर्ड) और इंस्टाग्राम पर, और कई फिल्मों में बिना बाल की छाती और चिकनेचमचमाते काँखों को देखने के बावजूद, हमें आश्चर्य हुआ कि सबसे आम जवाब थाकभी भी, जब मौका मिले।ये सुनकर आश्चर्य तो हुआ पर तस्सली भी हुई। कि देख दिखाव से ज़्यादा ज़रूरी बातें हैं लोगों की ज़िंदगी में जैसे आलस और सहूलियत  

ये सच है कि लोग, शरीर के बाल को लेकर जो धारणाएं हैं, उनकी चिंता करते हैं। लेकिन रोज़मर्रा की व्यस्तता और अपने आलस की वजह से इसज़रूरीलगने वाली चीज को टाल भी देते हैं। 

3. आप शरीर के बाल क्यों हटाते हैं?

 लोग इस सवाल का एक से ज्यादा जवाब दे सकते थे, और कइयों ने दिया भी। औरतों ने जो सबसे मुख्य कारण चुना, वो था आकर्षक होना । उसके बाद आयी स्वच्छता (hygiene), आदतऔर दूसरों की नज़र में बेहतर दिखना। मर्दों में, स्वच्छता सबसे मुख्य कारण था। उसके बाद के कारण थे खुद आकर्षक महसूस करना और दूसरों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित करना। इस क्रम मेंआदतका नंबर आखिरी था।

अन्य कारणोंवाली केटेगरी में, जवाब देने वाली (ज्यादातर औरतों) ने कभीकभी बड़े विस्तार में जवाब लिखे थे। कुछ ने शारीरिक पहलुओं जैसे आराम, मेडिकल स्थिति या आनंद का हवाला दिया। कई औरतों ने सामाजिक दबाव का भी हवाला दिया। दूसरों ने साफसुथरा महसूस करने का कारण बताया। और कुछ ने टालमटोलकर कहा, “जब हम बोर हो रहे होते हैं तो यही कर लेते हैं और कुछअरे, बस ऐसे ही

कुछ जवाबों से पता चला कि कई लोग इन विकल्पों से जूझ रहे थे। यानि वो ये तो जानते थे कि औरतों से बाल हटाने की उम्मीद करना सही नहीं हैं, लेकिन इस सोच को अभ्यास में लाना उन्हें आसान नहीं लग रहा था। ऐसे कई लोगों ने इस द्वंद को मज़ाकिया तरीके से पेश करने की कोशिश की: “हर बार जब मैं वैक्सिंग या थ्रेडिंग के लिए जाती हूँ तो सोचती हूँ कि मैं यहां क्यों हूं। पर मुझे कोई जवाब नहीं मिलता है। यही द्वंद एक कारण है कि मैं कई महीनों तक अपने शरीर के बाल बढ़ने देती हूँ और फिर आखिर में वैक्सिंग कराने पहुँच जाती हूँ। एक दिन शायद मैं खुद की सलाह मानने की हिम्मत कर पाऊंगी कि औरतों के शरीर पे बाल ना होना कोई सामाजिक दायित्व नहीं है। और फिर मैं वैक्सिंग नहीं कराउंगी। है न सरल?”

यहाँ कुछ और जवाब हैं!

मर्द, 18-25: “कई औरतों से बात करने के बाद, मुझे ये समझ में आया कि शरीर के बाल होना तो ठीक है, लेकिन तब तक ही जब तक वो बहुत ज्यादा ना हो जाएं। और नीचे का बागीचा जंगल ना बन जाये।

 औरत, 18-25: “मेरी माँ मुझे बाल हटाने को कहती है।

शरीर के बालों को लेकर लोगों द्वारा दिये गए कुछ और टर्म, जो उनके क्वालिटेटिव( qualitative) जवाबों में मिले, वो यहां हैं:

4.  हेयर एंड लवली (Hair and lovely): औरतों के शरीर के बाल के बारे में क्या सोचते हैं?

उससे कोई फर्क नहीं पड़ताऔरबाल कहाँ हैं, ये उस पर निर्भर करता है“, इन दोनों जवाबों का स्तर 30% का था। ।इससे ये जाहिर होता है कि ऐसे काफी लोग हैं जो शरीर के बाल को लेकर उतनी गंभीर धारणाएं नहीं रखते हैं।

हालांकि, देखा जाए तो जेंडर के बीच के दृष्टिकोण अलगअलग थे। जबकि औरतों के बीच सबसे अधिक वोट केउससे कोई फर्क नहीं पड़ताको मिला था, मर्दों के बीच सबसे लोकप्रिय जवाब थाठीक है, लेकिन ना हो तो और बेहतर है।दोतिहाई लोगों ने ये माना कि शरीर के बालप्राकृतिक और सुंदरथे। लेकिन वो दोतिहाई औरतें ही थीं।और सर्वे में भाग लेने वाली सभी औरतों का सिर्फ 9% थीं।  वो मर्द जिन्होंने इस राय को अपनाया था वो सभी भाग ले रहे मर्दों का 15% था। दोनों आंकड़े ये दर्शाते हैं कि औरतों के शरीर के बाल को पॉजिटिव रूप में देखने वाली सोच कितनी कम है। और जहां तक जवाबछी! थूथू ”, की बात है, तो भले ही वो लगभग 1% (7 लोगों) ही था, पर उन 7 में से 6 लोग मर्द थे।

5. हेयर एंड लवली: आप एक आदमी के शरीर के बाल के बारे में क्या सोचते हैं?

आपको याद है कि जब औरतों की बात आई थी तो सिर्फ एक तिहाई को ये लगता था कि शरीर के बालों से कोई फर्क नहीं पड़ता? लेकिन, जब मर्दों की बात आई तो पूरे 44% (सभी उम्र के ग्रुप का सबसे पॉपुलर जवाब) ने कहा कि मर्दों के शरीर पे बाल होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता“, ये बिलकुल कम पॉपुलर जवाब था। 2% लोगों की सोचजिसमें से 2 मर्द थे और 7 औरतें।

इसके अलावा, याद करो एक समय ऐसा भी था शरीर पे बाल होना मर्दों की सुंदरता का प्रतीक होता था। आज वैसा नहीं है। औरों के मुक़ाबले युवा वर्ग के लोग मर्दों के शरीर पे बाल ना होना ज्यादा पसंद करते हैं। 18-25 उम्र वाले वर्ग में से 12% नेजितना चिकनउतना बेहतरजवाब चुना। यहां इस जबाब का चुनाव 25-32 उम्र वाले ग्रुप से लगभग दोगुना था। और 32-50 की उम्र वाले उन लोगों की तुलना में एक तिहाई ज्यादा था जो चाहते थे कि मर्दों के शरीर बाल रहित हों।

दूसरा सबसे पॉपुलर जवाब, जो कि उन सब का था जिनके विचार थोड़े सहनशील हैं, वो थानिर्भर करता है, कि बाल कहां हैं ये जवाब देने वाले लोगों में से 74% औरतें थीं, और 25% मर्द। एक छोटी सी संख्या में उदार सोच भी उभर कर आई– “हेयर एंड लवलीकी। इस दल में तीनचौथाई औरतें थीं।

6 मॉडर्न या सन २००० में जन्मी- मिलेनिअल युवा पीढ़ी : आपने शरीर के बालों को कब हटाना शुरू किया?

अधिकतर लोगों ने कहा कि उन्होंने 12 से 20 साल के बीच की उम्र में बाल हटाना शुरू कर दिया था। सिर्फ बीस प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने पूरी तरह से एडल्ट होने के बाद ही ऐसा करना शुरू किया। अधिकतर मर्दों ने (करीब 59%)  कहा कि उन्होंने 12 से 20 साल की उम्र के बीच बाल हटाना शुरू किया। हम यह मान सकते हैं कि वे यहाँ सिर्फ चेहरे के बाल की शेविंग की बात कर रहे थे। लेकिन इनमें से 42% मर्द ऐसे थे जो 25-32 की उम्र के थे, और लगभग 35% 18-25 उम्र के। मर्दों के शरीर के बाल को लेकर जो हमने पिछले कुछ जवाब देखें हैं, उनसे ये तो साफ है कि वे सिर्फ चेहरे के बालों की बात नहीं कर रहे थे।

वो सभी लोग जिन्होंने कहा कि उन्होंने 15 की उम्र से पहले ही बाल हटाना शुरू कर दिया था, उनकी उम्र आज 50 से कम थी। और उनमें से 75% की उम्र 18 से 32 के बीच की थी। यह अनुमान लगाना गलत नहीं होगा कि पिछले कुछ २० सालों से, कम उम्र से ही लोगों ने सुंदरता के स्टैंडर्ड्स का पालन करना शुरू कर दिया है।

इन सवालों के जवाब देते समय लोगों की जो उम्र थी, उसे उस उम्र से मिलातेमिलाते, जब से उन्होंने बाल हटाना शुरू किया था, हमें कुछ अहम जानकारियां मिली। शरीर के बालों को हटाने वालों की संख्या ग्लोबलाइज़ेशन (वैश्वीकरण) के बाद, खासकर सन  २००० यशवी के बाद से, बड़े पैमाने पर बढ़ी है। और ये इशारा करती है कि शरीर की इमेज को लेकर इस बीच काफी महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।    

 

7. तेरे मेरे हेयर के चर्चे: सेक्स और शरीर के बालों के बीच के रिश्ते के बारे में आपको क्या लगता है?

अधिकतर लोगों ने माना कि ये दोनों चीज़ें एक दूसरे से जुड़ी हुई नहीं हैं। और यौन सम्बन्ध में बालों के होने या ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। कुछ लोगों ने कहा कि शरीर के बाल का होना सेक्स को बेहतर करता है। कैसे? लगभग 60% लोगों का मानना था कि बाल बिलकुल ना होना सेक्स और भी बेहतर होता है। और 28% के अनुसार बालों का होना इसे बेहतर बनाता है।

उन लोगों के गुट में, जिन्होंने कहा कि बाल का होना सेक्स में बाधा का कारण है, अधिकांश लोगों का मानना था कि बहुत ज़्यादा बालों का होना सेक्स  में बाधा का प्रमुख कारण है। और अधिकतर लोग जिन्होंने कहा कि शरीर के बाल और सेक्स का एक दूसरे से कोई सम्बन्ध नहीं है, वो औरतें थीं। जिन मर्दों ने

अपनी राय दी थी, उनमें से एक बड़े हिस्से ने कहा कि बालों के ना होने से सेक्स बेहतर होता है। और उसके बाद आया वो गुट जिसने कहा कि बालों का होना सेक्स में बाधा डालता है।

8. अंदर की बात: क्या आप प्यूबिक हेयर (pubic hair) हटाते हैं?

आजकल छोटे से छोटे ब्यूटी पार्लरों में भी ब्राजीलियन वैक्स (पूरी तरह से प्यूबिक-यानी गुप्तांगों के इर्द गिर्द

हेयर हटाने के लिए) और बिकनी वैक्स (स्विमसूट लाइन के बालों को हटाने के लिए) एक आम सर्विस बन गए हैं लेकिन जब प्यूबिक हेयर की बात आती है, तो सबसे आम जवाब था ट्रिमिंग (trimming), ना कि पूरी तरह से बालों की सफाई। जवाब देने वालों में तीन चौथाई औरतें थीं, और एक चौथाई मर्द। और एक बार फिर, हम सबकी सोच के परे, जो जवाब सबसे कम सुनने को मिला, वो था, “हाँ! नियमित रूप से

जवाब देने वालों के उम्र की मैपिंग करने से हमें यह पता चला कि कि गुप्तांगों के इर्द गिर्द के बालों को पूरी तरह से हटाना भी ग्लोबलीसाशन के  काफी आगे बढ़ने से प्रभावित है, यानी ये हाल ही का दस्तूर है । और ऐसा लगता है कि भले ही 18-25 की उम्र के लोग इन ब्यूटी स्टैंडर्ड्स पर विश्वास करते हैं, लेकिन वे अपने प्यूबिक हेयर्स को नियमित रूप से नहीं हटाते हैं। हम ऐसा अनुमान इसलिए लगा रहे हैं क्योंकि उनके पास दूसरों की तुलना में पैसे कम होते हैं। सेक्सुअली एक्टिव लोग जिनके पास सेक्स करने के लिए जगह और आजादी हो, उनकी संख्या 25+ उम्र के वर्ग में ज़्यादा होने की संभावना होती है।

9  कितेन तरीके हैं? आप शरीर के बालों को कैसे हटाते हैं?

 

इंस्टाग्राम की कवित्री (poet) नैना कटारिया की एक कविता वायरल हो गयी थी जिसमें बाल हटाने के तरीकों की एक लंबी लिस्ट थी:

जब कोई आदमी मुझे सुंदर कहता है

मैं बदले में देती हूँ, एक मुस्कान; एक मुस्कान जो बनी रही

तब भी, जब सबकुछ  ( वैक्सिंग) स्ट्रिप से

छिल दिया गया।

और मैं उसे चुनौती देती हूँ

कि वो इंतज़ार करे

तब तक, जब तक मेरे बाल वापस नहीं जाते।

कटारिया या किसी और को इस बात से कोई ताज्जुब नहीं होता होगा कि वैक्सिंग और थ्रेडिंग जैसे कष्टदायक तरीकों का इस्तेमाल कोई मर्द नहीं करता। सिर्फ 6 मर्दों ने कहा कि वे वैक्सिंग करते हैं, और सिर्फ एक ने कहा कि वह थ्रेडिंग भी करता है। सबसे महंगा ऑप्शन: लेजर (laser), औरतों में सबसे कम पॉपुलर था। और पुरुषों या ट्रांस लोगों में तो इसका जिक्र भी नहीं था। केवल 50 वर्ष से कम उम्र के लोग इस को चुनते थे। लेकिन इसके महंगे होने के कारण ऐसे लोगों की संख्या बहुत ही कम थी। सर्वे में भाग लेने वाले 3 ट्रांस लोगों में से, सभी ने कहा कि वे शेविंग करते हैं, 2 ने कहा कि वे ट्रिंमिंग (trimming) भी करते हैं, और तीनों ने कहा कि वे वैक्सिंग और थ्रेडिंग भी करते हैं। हमारे 665 जवाब देने वाले लोगों (respondants) में से सिर्फ 3% ने ही कहा कि वे शरीर के बाल बिल्कुल भी नहीं हटाते हैं।

वैसे तो लगभग आधे लोगों ने कहा कि वो बाल हटाने के लिए सिर्फ किसी एक तरीके का ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन करीब एक चौथाई लोगों ने माना कि वो दो तरीकों के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करते हैं। सबसे पॉपुलर कॉम्बिनेशन था वैक्सिंग और थ्रेडिंग का। उसके बाद था शेविंग और ट्रिमिंग। हालाँकि 22% लोगों ने तीन तरीकों के कॉम्बिनेशन को अपनाया था। इनमें से लगभग आधे लोगों ने शेविंगवैक्सिंगथ्रेडिंग जैसे पॉपुलर तरीकों का इस्तेमाल किया। जबकि 9% लोगों ने चार तरीकों का इस्तेमाल किया, और इसमें शेविंगट्रिमिंगवैक्सिंगथ्रेडिंग को सबसे पॉपुलर कॉम्बिनेशन माना गयाजो कि उनमें से 75% लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। और 18 लोगों ने तो सभी 5 तरीकों का इस्तेमाल भी किया था।

10 क्या आपने सालों तक शरीर के बालों को हटाने के बाद, अब ऐसा करना बंद किया? ये कैसा लगता है?

 

हम सोच रहे थे कि क्या शरीर के बाल हटाने की नियमित आदत को खत्म करना सच में मुश्किल है। ऐसे लोग जिन्होंने कहा कि वे शरीर के बाल हटाना बंद कर चुके हैं, उनमें से सबसे बड़ा आयुवर्ग (age group) था 25-32 का। और इन में से 86% के करीब औरतें थीं। औरतों की तरफ से इसके अलगअलग तरह के जवाब रहे थे। और यह इस बात की तरफ इशारा था कि उनकी ज़िन्दगी में शरीर के बाल कितनी बड़ी भूमिका अदा करते हैं। जिन्होंने माना था कि उन्होंने शेविंग करना अब बंद कर दिया है, उनमें से आधे तो इस निर्णय से खुश लग रहे थे। लगभग 18% आज़ादी और राहत की सांस ले रहे थे, जबकि 13% के अंदर अब भी एक द्वन्द चल रहा था। हालाँकि 14% ऐसे लोग जिन्होंने शेविंग करना बंद नहीं किया था, उनके जवाब भी इस ओर इशारा कर रहे थे कि वह अपने निर्णय से खुश थे। 9% ने कहा कि वे बेशक इसे बंद करना चाहेंगे। चार प्रतिशत लोग अंतर्द्वंदित (conflicted) और रक्षात्मक (defensive) महसूस कर रहे थे। दो औरतों ने कहा कि इसे बंद ना कर वो आज़ादी और राहत महसूस कर रही हैं।

यहां हमारी बालों की यात्रा का अंत होता हैं। और अब हम पेश करते हैं बालों के ऊपर की हमारी सबसे पसंदीदा कविता। एलिजाबेथ बिशप की कविता शैम्पू (The Shampoo) में एक साफ सुथरा लेकिन रोमांटिक सुर है, जो हमारा साथ देगा हैं।

 

तुम्हारे काले बालों में वो टूटते तारे

चमकदार बनावट वाले

जाने कहाँ जा रहे,

इतनी तेज़, इतनी जल्दी?

आओ, मुझे इन्हें धोने दो

टिन के बड़े बेसिन में

जो दागदार चमक वाले चंद्र के समान है,

उसमें

 

 

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